उन्होंने कहा कि भूकंप का कोई निश्चित समय भी नहीं बताया जा सकता। विकसित देशों सहित पूरे विश्व में वैज्ञानिक अभी इस विषय पर शोध कर रहे हैं।
गुप्ता ने बताया कि 7.5 तीव्रता वाले भूकंप के बाद ट्रीमर्स यानी बाद के हलके झटके आते ही हैं, लेकिन वह भी बहुत देर तक नहीं आते। यह ट्रीमर तभी तक आते हैं, जब तक पृवी के अंदर की अतिरिक्त ऊर्जा पूरी तरह बाहर नहीं निकल जाती।
उन्होंने बताया कि अगर कोई व्यक्ति यह कह रहा है कि इतने बजे भूकंप आएगा, तो वह कोरी अफवाह होगी। कुछ शरारती तत्व दहशत फैलाने के लिए ऐसा कहते हैं। ऐसी बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
गुप्ता ने बताया कि पृथ्वी के भीतर लगातार परिवर्तन होते रहते हैं और उसी के चलते पृवी के अंदर ऊर्जा एकत्र होती रहती है। यह ऊर्जा जब बहुत अधिक हो जाती है, तो उसे निकलने की जगह चाहिए होती है। ऐसे में जहां भी कमजोर चट्टानें मिलती हैं, उसी ओर ऊर्जा का प्रवाह हो जाता है।
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