लंदन, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। दुनिया में आज भी लाखों लोगों को सर्जरी उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि पथरी होने, हड्डी टूटने या कठिन प्रसव के दौरान मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं।
या तो सभी को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है या इलाज का खर्च सभी लोग वहन नहीं कर सकते। प्रसिद्ध चिकित्सा पत्रिका लैंसेट में प्रकाशित एक शोध में यह बात सामने आई है।
यह शोध लंदन में सोमवार को लांच हुई एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है। इस शोध के परिणामों के मुताबिक, दुनिया में दो तिहाई लोगों के पास जरूरत के समय में सुरक्षित और सस्ती सर्जरी और एनेस्थीसिया की पहुंच नहीं है।
स्वीडन के लुंड विश्वविद्यालय के लार्स हंगदेर ने कहा, “साधारण, इलाज योग्य शल्य चिकित्सा स्थितियों के कारण कई लोगों की मौत हो रही है। यह समस्या विशेष तौर पर मध्यम आय वाले पूर्वी, पश्चिमी और मध्य अफ्रीका के उप-सहारा देशों और दक्षिण और दक्षिणपूर्व एशियाई देशों में व्याप्त है।” लार्स इस शोध के प्रमुख शोधकर्ता भी हैं।
इस शोध को सर्जरी के विभिन्न क्षेत्रों और एनेस्थीसिया के 25 विशेषज्ञों द्वारा पूरा किया गया है। इसमें 100 से अधिक देशों ने हिस्सेदारी निभाई है।
कम आय और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में स्थिति बहुत खराब है, जहां पर 10 में से नौ लोगों के पास उचित चिकित्सा सुविधा की पहुंच नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2010 में कुल मौतों (1.69 करोड़) में से एक तिहाई मामलों में इलाज और सर्जरी की जा सकती थी, हालांकि इनकी संख्या एचाईवी/एड्स, टीबी और मलेरिया से संयुक्त रूप से मरने वालों से अधिक थी।
मृत्यु और बीमारी के इस बोझ के बावजूद भी दुनिया की आबादी के स्वास्थ्य के लिए अभी तक सर्जरी की महत्वपूर्ण आवश्यकता के रूप में अनदेखी की गई है।
एक अन्य प्रमुख शोधकर्ता और किंग्स कॉलेज लंदन में किंग्स सेंटर फॉर ग्लोबल हेल्थ के निदेशक एंडी लेदर ने कहा, “शल्य चिकित्सा के अभाव में साधारण और आसान इलाज वाली बीमारियां घातक हो जाती हैं।”
वैश्विक समुदाय इस समस्या को अनदेखी करना जारी नहीं रख सकता।
एक साल में पूरी दुनिया में 31.3 करोड़ ऑपरेशन होते हैं। वहीं गरीब देश, जहां पर विश्व की एक तिहाई जनसंख्या रहती है वहां पर 20 में से केवल एक ऑपरेशन होता है।
dharmpath.com dharmpath