मोतिहारी (बिहार), 27 अप्रैल (आईएएनएस)। भूकंप से तबाह नेपाल के पोखरा से लौटकर बिहार के बापूधाम (मोतिहारी) रेलवे स्टेशन पर एक पैसेंजर ट्रेन से जब एक पूर्व बैंक अधिकारी उतरे तो उनके बेटे रामदर्शन सिंह सहित पूरे परिवार के सदस्यों ने उन्हें बांहों में भर लिया। वह मौत को मात देकर सकुशल घर लौट आए।
मोतिहारी (बिहार), 27 अप्रैल (आईएएनएस)। भूकंप से तबाह नेपाल के पोखरा से लौटकर बिहार के बापूधाम (मोतिहारी) रेलवे स्टेशन पर एक पैसेंजर ट्रेन से जब एक पूर्व बैंक अधिकारी उतरे तो उनके बेटे रामदर्शन सिंह सहित पूरे परिवार के सदस्यों ने उन्हें बांहों में भर लिया। वह मौत को मात देकर सकुशल घर लौट आए।
भारतीय स्टेट बैंक के सेवानिवृत्त शाखा प्रबंधक सुरेश्वर प्रसाद सिंह को लगा, जैसे वर्षो बाद अपने परिजनों से मिल रहे हों। हकीकत है कि सुरेश्वर नेपाल के पोखरा से मौत को मात देकर अपने घर लौटे थे और उनके जीवित लौटने की खुशी न केवल उनके चेहरे पर साफ छलक रही थी, बल्कि उनके बेटे की आंखें भी पिता को देखकर भर आई थीं।
सुरेश्वर 20 अप्रैल को अपने दामाद डॉ़ सत्यजीत सिंह के गृह-पूजनोत्सव में पोखरा गए थे और 25 अप्रैल को भयानक भूकंप ने पूरे नेपाल को हिला दिया। उन्होंने अपनी आंखों से पोखरा क्षेत्र को बर्बाद होते देखा है। अब भी उनकी आंखों में त्रासदी का खौफ है।
वह कहते हैं, “अपने जीवन में ऐसी त्रासदी कभी नहीं देखी। बड़े-बड़े मकान ताश के पत्तों की तरह ढह रहे थे। हर तरफ अफरा-तफरी। लोग अपनी जान बचाने के लिए दौड़ रहे थे।”
उन्होंने बताया कि किसी तरह ऊंचे किराये पर उन्होंने एक गाड़ी ली और वीरगंज पहुंच गए। वह कहते हैं कि सड़कें टूट गई हैं। रास्ते में बड़े-बड़े पत्थर पड़े हुए हैं।
सुरेश्वर तो खुशनसीब निकले कि जीवित अपने परिजनों के पास आ गए, परंतु बिहार में कई ऐसे भी बदनसीब परिवार हैं, जिनके अपनों का कोई पता अब तक नहीं चल पाया है, अगर जानकारी भी मिली है तो वे फंसे हुए हैं। उन्हें वापस बिहार आने की कोई व्यवस्था नहीं है।
नेपाल से सटे रक्सौल के कई लोग नेपाल की राजधानी काठमांडू सहित वहां के विभिन्न शहरों में व्यवसाय करते हैं। इस क्षेत्र के सैकड़ों लोग नेपाल में मजदूरी करते हैं।
धागा व्यवसायी संतोष का छोटा भाई मनीष काठमांडू में रहकर धागा का व्यवसाय करता है। शनिवार को भूकंप के बाद मनीष से कोई संपर्क नहीं होने पर पूरे परिवार के लोग चिंतित थे।
संतोष बताते हैं, “रविवार के मनीष से बात हुई, वह ठीक तो है परंतु अब वह अब अपने घर लौटना चाहता है, मगर कोई साधन उपलब्ध नहीं है।”
यही हाल हरसिद्धि प्रखंड के नवका टोला निवासी केशवलाल साह की भी है। उनके दो भाई काठमांडू में व्यवसाय करते हैं। केशव कहते हैं कि रविवार को एक भाई से टेलीफोन से बात जरूर हुई है, परंतु फोन बीच में ही कट गया। पूरी बात नहीं होने के कारण मन सशंकित है।
इधर, रक्सौल की बबीता देवी कहती हैं कि भूकंप के बाद उनके बेटे की कोई खबर नहीं मिल पा रही है। उनका बेटा सोहन काठमांडू में मजदूरी करता है। किसी अनहोनी की आशंका से बबीता परेशान हैं। बस, भगवान से अपने बेटे की सलामती की दुआ कर रही हैं।
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