हिलेरी ने भारतीय दान मिलने के दावे को नकारा

वाशिंगटन, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने एक किताब के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि नई दिल्ली की तरफ से मिले दान के कारण भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु संधि को लेकर वह बतौर सीनेटर अपने रुख पर कायम नहीं रह पाई थीं।

वाशिंगटन, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने एक किताब के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि नई दिल्ली की तरफ से मिले दान के कारण भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु संधि को लेकर वह बतौर सीनेटर अपने रुख पर कायम नहीं रह पाई थीं।

राष्ट्रपति चुनाव में उनके प्रचार-अभियान के प्रवक्ता जोश स्कवेरिन ने वाशिंगटन की राजनीतिक समाचार साइट पोलिटिको को बताया, “क्लिंटन कैश पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश है।”

पोलिटिको के मुताबिक, ‘क्लिंटन कैश: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ हाउ एंड व्हाई फॉरेन गवर्मेट्स एंड बिजनसेस हेल्प मेक बिल एंड हिलेरी रिच’ में भारत को संदर्भ कर एक अध्याय लिखा गया है। यह किताब पीटर स्कवीजर ने लिखी है।

अध्याय ‘इंडियन न्यूक्स : हाउ टू विन ए मेडल बाय चेंजिंग हिलेरीज माइंड’ में भारत की तरफ से दिए गए दानों और संदेशों को शामिल किया गया।

पोलिटिको प्रवक्ता के हवाले से लिखा गया है, “भारत के प्रति हिलेरी का रवैया साल दर साल विकसित हुआ है, भारतीय परमाणु संधि की चर्चा के दौरान तत्कालीन सीनेटर हिलेरी के बयान और वोट की समीक्षा से लगता है कि स्कवीजर की दलील के दो तथ्य गलत हैं।”

पोलिटिको का कहना है कि हिलेरी ने वास्तव में सार्वजनिक रूप से 2006 में संधि को लेकर समर्थन जाहिर किया था और उन्होंने संशोधन के खिलाफ वोट किया था।

लेकिन उसी साल जून में हिलेरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विधेयक के खिलाफ समर्थन की घोषणा की और सीनेटरों रिचर्ड लुगार और जो बाइडन की प्रशंसन की, जिन्होंने हिलेरी के मुताबिक बुश प्रशासन के शुरुआती प्रस्ताव में सुधार किया था।

उनके हवाले से किताब में लिखा गया है, “भारत तेजी से विकास कर रहा है और विश्व में अग्रसर देश होने के नाते और ज्यादा जिम्मेदारी आती है, हमें सुरक्षा, ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य की साझा चुनौतियों में हमारे भारतीय मित्रों के साथ और अधिक मजबूत सहयोग के साथ काम करने की जरूरत है।”

पोलिटिको भारतवंशी होटल व्यवसायी संत चटवाल की गतिविधि की व्याख्या करते हुए कहता है कि परमाणु संधि के समर्थन के लिए प्रभावशाली भारतियों ने हिलेरी को दान दिया था।

चटवाल ने पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की लंदन में सार्वजनिक सभा आयोजित की थी, जिसमें 4.5 लाख डॉलर खर्च हुआ था।

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