रायपुर, 6 मई (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में केमिकल से पके फल खाने के बाद चार मवेशियों की मौत हो गई है। शहर में थोक व चिल्हर फल व्यवसायी सड़े गले फलों को नया बस स्टैंड के पास सड़क के किनारे खुले स्थान में फेंक देते हैं। ये केमिकलयुक्त सड़े फल मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
केमिकलयुक्त सड़े फल की वजह से मवेशी पालक किसान परेशान हैं। बेमेतरा के सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्राधिकारी जेके सोनी का कहना है कि अनुमानित पाइजन के पूरे लक्षण हैं। फेफड़े, नाक व योनीद्वार से रक्तश्राव होता पाया गया है।
बेमेतरा नगरपालिका के सीएमओ होरी सिंह ठाकुर का कहना है कि घटना के संबंध में सूचना मिली है। जांच कराकर और जानकारी मंगाया जा रहा है। दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि शहर में थोक व्यवसायी केला, आम, पपीता, नीबू जैसे फलों को पकाने व फलों में आकर्षक कलर लाने के लिए कार्बाइड, एथेनाल जैसे केमिकल का प्रयोग करते हैं। जिससे फलों को जहरीला होने की शंका किसानों ने जाहिर किया है।
बेमेतरा के पशुपालक किसान बल्ला यादव ने बताया कि फेंके गए सड़े-गले फल खाने के बाद जानवरों को पतले दस्त व खून की उल्टी होने की शिकायत है। कुछ घंटे बाद जानवरों की मौत हो जाती है। रामेश्वर मिश्रा कचहरी पारा, कौशल वर्मा कुर्मी पारा के मवेशियों की जान जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि पहले जानवरों की मौत होने पर इसे कोई गंभीर बीमारी समझ रहे थे। लेकिन दूसरे जानवरों द्वारा किए गए उल्टी से आम के बीज (गुठली) निकलने से स्थिति स्पष्ट हो गई। फिर डॉक्टर बुलाकर इलाज कराया गया। किन्तु कोई प्रभाव नहीं पड़ा। अब तक चार जानवरों की मौत हो चुकी है।
फल व्यवसायियों के अनुसार कार्बाइड जहां 50 से 60 रुपये किलो में मिल जाता है। वहीं एथेनाल 2 रुपये किलो में मिल रहा है। जिससे लागत अधिक लगने से पके फलों की कीमत में बढ़ोतरी हो जाती है।
इधर फलों को कार्बाइड से पकाने पर शासन व न्यायालय ने प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद शहर में कार्बाइड का प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। अब जब प्रशासन हरकत में आया है तब इस पर रोक लगने के आसार दिख रहे हैं।
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