ओलावृष्टि और बरसात के कहर से बची आम की फसल पर अब मधुआ और लस्सी, मांहू रोग का प्रकोप हो रहा है। इसकी रोकथाम के लिए किसान दवा के छिड़काव पर लागत लगा रहे हैं। इसके बावजूद इन रोगों पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। रोगों के कारण आम की पैदावार पचास प्रतिशत तक कम होने के असार हैं। जिसके बाद बागवानों को इस बात की चिंता सताने लगी है कि वह इस साल घाटे की भरपाई कैसे कर पाएंगे।
बागवान महेश कुमार ने बताया कि जब आम के पेड़ों पर फूल आया था। यह फूल बैमौसम बरसात और ओलावृष्टि के चलते झड़ गया था। चंद दिनों बाद आंधी और पछुआ हवा के चलने के कारण कच्ची फसल प्रभावित हो गई। अब अचानक फसल पर रोगों का कहर शुरू हो गया गया। इससे आम के उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ा है।
बागवान मुकेश सिंह का कहना है कि उनके आम बाग में काफी बौर आए थे, लेकिन पहले ओलों, बारिश और फिर आंधी के कारण फलों को काफी नुकसान हुआ। वह कहते हैं, उसके बाद रोगों के कारण बची पैदावार भी खत्म हो गई।
कृषि वैज्ञानिक सुरेश शुक्ला बताते हैं कि आम बागवानों को मधुआ और लस्सी रोगों के कारण काफी नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसान मधुआ और लस्सी व मांहू रोग से बचाव के लिए प्रमाणित कीटनाशक दवाओं का ही छिड़काव करें।
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