नेपाल भूकंप : साधुओं ने क्षतिग्रस्त आश्रम छोड़ने से किया इंकार

देवघाट (नेपाल), 7 मई (आईएएनएस)। नेपाल में विनाशकारी भूकंप से जहां एक ओर भारी तबाही हुई है। वहीं, यह भीषण भूकंप नेपाल के कुछ साधुओं का ईश्वर में विश्वास हिलाने में असफल रहा है।

देवघाट (नेपाल), 7 मई (आईएएनएस)। नेपाल में विनाशकारी भूकंप से जहां एक ओर भारी तबाही हुई है। वहीं, यह भीषण भूकंप नेपाल के कुछ साधुओं का ईश्वर में विश्वास हिलाने में असफल रहा है।

भगवान में पूर्ण विश्वास रखने वाले इन दर्जनभर साधुओं ने भूकंप की वजह से तहस-नहस हुए हरिहर आश्रम छोड़ने से इंकार कर दिया है। इस आश्रम की हालत यह है कि इमारत की नींव और दीवारों में कई दरारें आ गई हैं। काठमांडू से देवघाट लगभग 250 किलोमीटर दूर है।

अधिकारियों और उनके स्वयं के संरचनात्मक इंजीनियरों ने इन साधुओं को इस क्षतिग्रस्त इमारतों में रहने के जोखिमों के बारे में आगाह किया है, लेकिन साधुओं का कहना है कि जिंदगी और मौत हर जगह व्याप्त है।

एक 95 वर्षीय साधु ने आईएएनएस को बताया, “हमने कई दशकों पहले ही इस सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया। मृत्यु और हानि का डर हमें डरा नहीं सकता।”

भगवा कपड़ों में एक मध्यम आयु की महिला ने दुख के साथ कहा कि यह इमारत आसपास पढ़ने वाले युवाओं और विद्यार्थियों के लिए एक असुरक्षित स्थान बन गया है।

इमारत के भोजन कक्ष में आई दरारों को दिखाते हुए इस महिला ने आईएएनएस संवाददाता से कहा, “बहुत सारे लोग यहां पूजा और अन्य सनातन धर्म-कर्म के लिए जल्दी आ जाते हैं, लेकिन अब इनकी संख्या में कमी आई है। हम इसे समझ सकते हैं। सभी को अपनी मृत्यु का डर है।”

जमीन, दीवारों और यहां तक कि छत में दरारों को ध्यान में रखते हुए इंजीनियरों का कहना है कि इस इमारत को बंद कर देना चाहिए, लेकिन साधुओं का कहना है कि वह किसी भी कीमत पर इस आश्रम से नहीं जाएंगे।

इस दो मंजिला इमारत में राम दरबार, शिव पार्वती और विष्णु-लक्ष्मी के अलग-अलग मंदिर हैं, लेकिन अब यहां का नजारा सुनसान हो गया है।

युवा पुजारी अपने घर चले गए हैं। गर्भगृह को बंद कर दिया गया है। क्योंकि यह काफी कमजोर है और लोगों को वहां नहीं जाने की सलाह दी गई है।

लेकिन ये वृद्ध साधु और महिलाएं अभी भी देवी-देवताओं के स्नान, श्रृंगार, भोग और आरती जैसे दैनिक अनुष्ठानों का संचालन करते हैं।

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