जम्मू, 8 मई (आईएएनएस)। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्रा करना इन दिनों अधिक तकलीफदेह हो गया है। राजमार्ग पर लगभग 300 किलोमीट की यात्रा में आमतौर पर आठ घंटे लगते थे, लेकिन अब दोगुने से अधिक समय लग रहा है।
जम्मू, 8 मई (आईएएनएस)। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्रा करना इन दिनों अधिक तकलीफदेह हो गया है। राजमार्ग पर लगभग 300 किलोमीट की यात्रा में आमतौर पर आठ घंटे लगते थे, लेकिन अब दोगुने से अधिक समय लग रहा है।
मार्ग की दयनीय स्थिति यातायात विभाग के कुप्रबंधन का परिणाम है। इस राजमार्ग पर रोजाना 7,000 से अधिक भारी और हल्के वाहन आते-जाते हैं।
घाटी को खाद्यान्न, खाद्य तेल, मांस अंडा, दवाइयां और पेट्रोलियम पदार्थो सहित सभी आवश्यक सामानों की आपूर्ति इसी राजमार्ग से की जाती है।
बारिश की वजह से भूस्खलन, भारी बर्फबारी से मार्ग अवरुद्ध हो गया है, जिस वजह से प्रशासन को यह राजमार्ग बंद करना पड़ा है।
प्रशासन अभी भी इस राजमार्ग पर दो तरफा यातायात बहाल करने में असमर्थ है, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है।
अंतहीन यातायात जाम की वजह से नागरोटा, उधमपुर, पीडा और कम से कम तीन अन्य स्थानों पर भी रुकना पड़ता।
यातायात पुलिस की लापरवाही भी साफ नजर आती है। वह सिर्फ मूक दर्शक बनकर खड़ी रहती है और वाहन चालक एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं।
मुझे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा हल्क-फुल्के अंदाज में की गई टिप्पणी याद आ रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि एक चुनिंदा पुलिस अधिकारी की तैनाती जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर इसलिए की जाती है, क्योंकि वह एक गरीब परिवार से संबद्ध रखता है।
यह काफी रोचक है कि सुरक्षा लिए तैनात किए जाने वाले सैन्य अधिकारियों को राजमार्ग को यातायात के लिए साफ करते हुए देखा जा सकता है।
माल से लदे ट्रकों को राजमार्ग पर यहां-वहां खड़े देखा जा सकता है, जबकि हल्के और छोटे वाहन राजमार्ग से गुजरने के लिए मार्ग साफ होने का इंतजार करते रहते हैं।
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