अगरतला, 9 मई (आईएएनएस)। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार को भारतीय संसद द्वारा पास किए गए भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौते (एलबीए) का समर्थन करने के लिए धन्यवाद दिया। एक अधिकारी ने यह जानकारी शनिवार को दी।
त्रिपुरा के एक सरकारी अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर आईएएनएस को बताया, “बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ने एलबीए के समर्थन के लिए शुक्रवार रात फोन पर मुख्यमंत्री को धन्यवाद कहा।”
अधिकारी के मुताबिक सरकार ने फोन पर हसीना से कहा, “संसद में एलबीए को पेश करने के साथ भारत-बांग्लादेश के संबंध भविष्य में और मजबूत होंगे। त्रिपुरा के बांग्लादेश के साथ संबंध नई ऊंचाई हासिल करेंगे।”
सरकार ने हसीना को यह भी बताया कि त्रिपुरा सरकार राज्य में एक भारत-बांग्लादेश मित्रता पार्क की स्थापना कर रही है, जो 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संघर्ष का प्रतीक होगा।
अधिकारी ने बताया, “त्रिपुरा सरकार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री को पार्क के उद्घाटन के लिए आमंत्रित करेगी। हसीना ने भी फिर से त्रिपुरा के दौरे के लिए उत्सुकता जताई है। ” इससे पहले हसीना ने जनवरी 2012 में त्रिपुरा का दौरा किया था।
अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरुवार को सरकार को फोन कर एलबीए के संबंध में चर्चा की थी और मदद के लिए सरकार को धन्यवाद दिया था।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके तत्कालीन बांग्लादेशी समकक्ष शेख मुजिबुर रहमान द्वारा समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के 41 सालों बाद संसद ने बांग्लादेश के साथ एलबीए की शुरुआत के लिए सात मई को संविधान संशोधन विधेयक पास किया।
इस भूमि हस्तांतरण के प्रोटोकॉल के तहत भारत 17,160.63 एकड़ क्षेत्र में फैले 111 एन्क्लेव बांग्लादेश को हस्तांतरित करने वाला था, जबकि बांग्लादेश 7,110.02 एकड़ पर फैले 51 एन्क्लेव भारत को हस्तांतरित करता।
संसद द्वारा विधेयक पारित होने के बाद अब भारत-बांग्लादेश की 6.1 किलोमीटर की अपरिभाषित सीमा का निर्धारण किया जाएगा। बांग्लादेश के 51 एन्क्लेव भारत के जिन राज्यों में आएंगे वो हैं, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और मेघालय।
एलबीए के अंतर्गत विवादित चंदानगर गांव भारतीय क्षेत्र में आ जाएगा, जबकि दक्षिणी त्रिपुरा स्थित मुहुरी चार की भूमि बांग्लादेश के क्षेत्र में चली जाएगी।
त्रिपुरा के राजस्व एवं लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री बादल चौधरी ने संवाददाताओं को बताया, “एलबीए के तहत त्रिपुरा के दो क्षेत्रों के हस्तांतरण से कोई परेशानी नहीं होगी।”
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