कोलकाता, 10 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल के दौरे पर आए नरेंद्र मोदी रविवार को मशहूर दक्षिणेश्वर काली मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की।
मोदी के साथ राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो व अन्य लोग भी थे। इसके साथ ही मोदी काली मंदिर के दर्शन करने वाले पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं।
हुगली नदी के पूर्वी तट पर स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर भवतारिणी को समर्पित है। भवतारिणी, काली मां का एक रूप है।
मंदिर का निर्माण 1855 में समाजसेवी रानी रसमणि ने करवाया था। वह काली मां की परम भक्त थीं।
मंदिर के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के सदस्य कुशाल चौधरी ने कहा, “मोदी यहां आए पहले प्रधानमंत्री हैं। मोदी ने देवी मां का चरण स्पर्श किया और आरती भी की।”
मोदी ने वह कमरा भी देखा, जहां 19वीं सदी के महान संत एवं विचारक श्री रामकृष्ण परमहंस रहा करते थे। उन्होंने पुस्तकालय और आगंतुक पुस्तक में हस्ताक्षर भी किए।
कुशाल ने कहा, “मोदी ने आगंतुक पुस्तक में गुजराती में हस्ताक्षर किए। उन्होंने देवी और स्वामी को प्रणाम लिखा।”
मंदिर के अधिकारियों ने मोदी को दस्तकारी वाला एक अशोक स्तंभ और काली मां की एक प्रतिकृति भी भेंट की।
दक्षिणेश्वर मंदिर से मोदी रामकृष्ण मिशन के वैश्विक मुख्यालय बेलूर मठ पहुंचे।
प्रधानमंत्री दौरे को देखते हुए जबर्दस्त सुरक्षा प्रबंध किए गए थे।
रामकृष्ण मिशन के एक सदस्य ने कहा, “मोदी का शुरुआती दिनों से ही रामकृष्णन मिशन एवं रामकृष्णन मठ से जुड़ाव रहा है। यहां आकर वह भावनाओं से भीग गए। उनका यहां का दौरा खुशी एवं उत्साह का मौका है।”
मोदी ने शनिवार को कोलकाता स्थित रामकृष्णन मिशन सेवा प्रतिष्ठान अस्पताल में रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिशन के बीमार अध्यक्ष स्वामी आत्मस्थानंद को फोन किया था और उनका आशीर्वाद लिया था।
स्वामी आत्मस्थानंद 21 फरवरी से अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
मोदी अपनी युवावस्था में आत्मस्थानंदजी महाराज से रोजाना मिला करते थे।
उन्होंने 2013 में बेलूर मठ का दौरा किया था और स्वामी आत्मस्थानंद से आशीर्वाद लिया था। मोदी उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री थे।
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