काठमांडू, 10 मई (आईएएनएस)। नेपाल की मनीषा के.सी. को यह विश्वास नहीं हो रहा कि बसंतपुर दरबार स्क्वे यर भूकंप में आधा टूट कर अब मलबे में तब्दील हो चुका है, वहीं उन्हें उम्मीद है कि उनके देश की नष्ट हुई ऐतिहासिक धरोहर पहले की तरह अपना गौरव पा लेगी।
काठमांडू, 10 मई (आईएएनएस)। नेपाल की मनीषा के.सी. को यह विश्वास नहीं हो रहा कि बसंतपुर दरबार स्क्वे यर भूकंप में आधा टूट कर अब मलबे में तब्दील हो चुका है, वहीं उन्हें उम्मीद है कि उनके देश की नष्ट हुई ऐतिहासिक धरोहर पहले की तरह अपना गौरव पा लेगी।
24 वर्षीय छात्रा ने आईएएनएस को बताया, “हमारी विरासत ऐसी ही है। यह पुराने महल का इलाका था, बाद में यह नारायणहिती स्थानांतरित हो गया, इसे दोबारा बनाया जाना चाहिए।”
लेकिन अब वह दरबार स्क्वे यर के ध्वस्त होने से पहले और बाद की तस्वीरें लेकर खुद को तसल्ली दे रही हैं।
उसने कहा, “मैंने मलबे की भी तस्वीर ली है। इसे दोबारा बनने में वक्त लगेगा। मेरी जब इच्छा होगी, मैं तस्वीर देखकर दोबारा इस स्थान पर आ सकती हूं।”
उन्होंने कहा कि इस स्थान को देख कर मुझे बेहद तकलीफ हुई, जो कि अब सिर्फ मलबे के अतिरिक्त कुछ नहीं है।
मनीषा की तरह कई नेपाली नागरिक धरोहर स्थल, पर्यटन स्थल और अन्य लोकप्रिय स्थानों का दौरा कर रहे हैं और वहां की तस्वीरें ले रहे हैं, जो कि अब सिर्फ भग्नावशेष बचे रह गए हैं।
कई स्थानीय लोगों को भी तस्वीरें लेते देखा जा सकता है और वे उन अवशेषों के साथ सेल्फी ले रहे हैं, जो दो सप्ताह पहले अखण्ड थे।
नेपाल में 25 अप्रैल को आए विनाशकारी भूकंप के बाद काठमांडू, ललितपुर और भक्तपुर के प्राचीन धरोहरों के 90 फीसदी हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए हैं और नेपाल के पुरातत्व विभाग के मुताबिक, इसके निर्माण में कम से कम 10 साल का वक्त लगेगा।
ये प्राचीन धरोहर स्थल और स्मारक ऐतिहासिक महत्व और वास्तुकला के कारण इन तीन शहरों में आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे हैं।
विभिन्न रपटों के अनुसार, करीब बसंतपुर दरबार स्क्वे यर के मंदिरों का 80 फीसदी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है।
नेपाली गृह मंत्रालय ने शनिवार सुबह बताया कि भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 7,912 हो गई है और 17,871 लोग घायल हुए हैं।
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