भारत-चीन के बीच 22 अरब डॉलर का समझौता (राउंडअप)

शंघाई, 16 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत तथा चीन के बीच बौद्ध धर्म की साझा विरासत और उनकी समानताओं पर बल दिया और कहा कि दोनों देश न केवल आपसी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए अच्छा करेंगे।

मोदी ने शंघाई में कई कार्यक्रमों में शिरकत के साथ ही अपने तीन दिवसीय चीन दौरे को समाप्त कर दिया।

उन्होंने शीर्ष स्मार्टफोन निर्माता कंपनी श्याओमी के प्रमुख लिन बिन तथा अलीबाबा के प्रमुख जैक मा सहित चीन के शीर्ष कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) से मुलाकात की।

उन्होंने उन्हें भारत में व्यापार को सुगम बनाने के प्रति आश्वस्त किया।

मोदी ने भारत-चीन व्यापार मंच पर कहा किभारत व्यवसाय के लिए तैयार है और व्यवसाय को सरल बनाने के लिए सुधार की लगातर कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चीनी उद्योग के लिए भारत ऐतिहासिक अवसरों को पेश कर रहा है।

दोनों देशों के बीच 22 अरब डॉलर के 21 व्यावसायिक समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।

उन्होंने कहा, “आप विश्व का कारखाना हैं। हम विश्व का ‘बैक ऑफिस’ हैं। हम साथ मिलकर अपने लोगों के लिए प्रगति और समृद्धि ला सकते हैं।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने समझौते से पहले ट्विटर पर लिखा था, “भारत और चीन के बीच भारत-चीन व्यापार मंच पर 22 अरब डॉलर का 21 व्यवसायिक समझौतों पर हस्ताक्षर हो रहे हैं।”

मोदी ने अपने भाषण में इस बात पर जोर दिया कि भारत-चीन साझेदारी बढ़नी चाहिए और बढ़ेगी।

उन्होंने कहा, “भारत तथा चीन के बीच सौहार्दपूर्ण साझेदारी महाद्वीप के आर्थिक विकास तथा राजनीतिक स्थिरता के लिए आवश्यक है। आइये, हम साथ मिलकर पारस्परिक हित और हमारे महान देशों की प्रगति तथा समृद्धि के लिए काम करें।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार नवाचार, शोध तथा विकास और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।

मोदी ने कहा, “हम अपनी पूरी जनसंख्या में करीब 65 फीसदी युवाओं के रोजगार का सृजन के लिए विनिर्माण को बड़े स्तर पर बढ़ावा देना चाहते हैं।”

उन्होंने विभिन्न कंपनियों के सीईओ से कहा, “भारत में आधारभूत संरचनाओं के विस्तार तथा इससे संबंधित गतिविधियों की संभावना व्यापक है।”

मोदी ने एक्सपो एक्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर में हिंदी में कहा, “भारत तथा चीन दुनिया की पूरी आबादी के एक तिहाई हैं। क्या आपने कभी इस ताकत का अहसास किया है? समय बदल चुका है और यही कारण है कि चीन तथा भारत न केवल अपनी समस्या का समाधान कर सकते हैं, बल्कि बाकी दुनिया की भी मदद कर सकते हैं।”

‘मोदी-मोदी’ के नारों के बीच पांच हजार भारतीयों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उनकी एक साल पहले आम चुनाव में हुई शानदार जीत की वर्षगांठ पर प्रवासी भारतीयों को संबोधित करना उनका सौभाग्य है।

मोदी ने शंघाई में फुतान विश्वविद्यालय में गांधी और भारतीय अध्ययन केंद्र का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि गांधी दर्शन आतंकवाद से लड़ने और जलवायु परिवर्तन से निपटने में मददगार हो सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी दोस्ती को ‘प्लस वन’ यानी अभिन्न करार दिया है।

उन्होंने कहा, “दो देशों के नेताओं के बीच इस तरह की गहरी मित्रता के बारे में चर्चा होती है और हमारी मित्रता उससे भी ऊपर है। ऐसी दोस्ती को केवल प्लस वन ही करार दिया जा सकता है। इस तरह की मित्रता में बेहद समय लगता है।”

चीन का दौरा खत्म कर मोदी एक दिवसीय दौरे पर मंगोलिया पहुंच गए हैं।

बीजिंग में शुक्रवार को मोदी ने प्रधानमंत्री ली केकियांग से वार्ता की और दोनों पक्षों ने 24 समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

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