नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सोमवार को यहां सभी राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के सामान्य प्रशासन विभागों (जीएडी) के प्रधान सचिवों की बैठक में विभागों के कामकाज की समीक्षा की।
यहां जारी एक बयान में कहा गया है कि बैठक में कार्मिक प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), यूपीएससी, सीबीआई और मंसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
बैठक में सिंह ने कहा कि सच्चाई यह है कि जीएडी/कार्मिक/डीओपीटी विभाग असल में सरकार की अनुसंधान और विकास शाखा हैं और प्रशासनिक तंत्र की ग्रीवा शिरा के रूप में काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि जीएडी/डीओपीटी की जिम्मेदारी सही समय और सही स्थान पर प्रत्येक अधिकारी की सामथ्र्य और योग्यता का अधिकतम इस्तेमाल करना है साथ ही काम करने का ऐसा माहौल प्रदान करना है जिसमें अधिकारी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।
मंत्रालय से जुड़े विभिन्न मुद्दों की समीक्षा करते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर को छोड़कर अधिकतर राज्यों में आईएएस की कैडर समीक्षा का काम पूरा हो गया है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह अगले दो सप्ताहों के भीतर आवश्यक दस्तावेज जमा करा देगी ताकि इस राज्य के लिए भी कैडर समीक्षा का काम जल्द से जल्द पूरा कराया जा सके।
‘न्यूनतम सरकार के साथ अधिकतम शासन’ देने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिबद्धता की चर्चा करते हुए जितेन्द्र सिंह ने वर्तमान सरकार के एक वर्ष के दौरान डीओपीटी द्वारा उठाए गए कुछ क्रांतिकारी फैसलों की चर्चा की जिनमें एकल हलफनामा/प्रमाण-पत्र के स्व सत्यापन की शुरूआत, वरिष्ठ नागरिकों के लिए जीवित होने का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता को समाप्त करने के लिए बायोमीट्रिक आधार कार्ड पर आधारित पेंशन पोर्टल की शुरुआत, आईएएस में राज्य स्तर के अधिकारियों को शामिल करने के लिए कट-ऑफ आयु को 54 वर्ष से बढ़ाकर 56 वर्ष करना, आईएएस परीक्षा के पैटर्न और पाठ्यक्रम में संशोधन और आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना के बीच आईएएस और अन्य सेवा के अधिकारियों का सफल निर्धारण शामिल है।
बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा गया जो आईएएस में शामिल होने वाले राज्य स्तर के प्रशासनिक सेवा अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण की अवधि को आठ सप्ताह से घटाकर छह सप्ताह करने से संबंधित था।
बैठक में संबद्ध राज्यों में प्रशासनिक सेवा बोर्डो का गठन करने के लिए राज्य सरकार और संघ शासित प्रशासनों द्वारा की गई प्रगति और जम्मू एवं कश्मीर, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में विशेष सीबीआई अदालतें गठित करने पर भी चर्चा हुई।
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