वाराणसी, 20 मई (आईएएनएस)। वाराणसी संसदीय सीट से शानदार जीत हासिल करने के बाद नरेंद्र मोदी जब प्रधानमंत्री बने थे, उसके बाद गाजे बाजे के साथ रवींद्रपुरी में एक प्रधानमंत्री का संसदीय कार्यालय खोला गया था। दावा था कि यहां से वाराणसी की जनता की शिकायतों का निपटारा होगा। 26 मई को मोदी सरकार को एक वर्ष होने जा रहा है और इस दौरान यह कार्यालय महज 10 फीसदी मामले निपटाने में ही सफल रहा।
वाराणसी, 20 मई (आईएएनएस)। वाराणसी संसदीय सीट से शानदार जीत हासिल करने के बाद नरेंद्र मोदी जब प्रधानमंत्री बने थे, उसके बाद गाजे बाजे के साथ रवींद्रपुरी में एक प्रधानमंत्री का संसदीय कार्यालय खोला गया था। दावा था कि यहां से वाराणसी की जनता की शिकायतों का निपटारा होगा। 26 मई को मोदी सरकार को एक वर्ष होने जा रहा है और इस दौरान यह कार्यालय महज 10 फीसदी मामले निपटाने में ही सफल रहा।
सूत्रों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में लगभग 1560 आवेदन आए, जिसमें महज 10 फीसदी का निस्तारण हो पाया। अब दलील यह दी जा रही है कि जिला प्रशासन के अधिकारी एवं राज्य सरकार यहां की शिकायतों को तवज्जो नहीं दे रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में पीएम के संसदीय कार्यालय में करीब 1560 लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे, लेकिन उनमें से करीब 150 आवेदनों का ही निस्तारण हो पाया।
सूत्रों बताते हैं कि बहुत सारी समस्याएं जिला प्रशासन व राज्य सरकार से जुड़ी होती हैं। लोगों के आवेदन मिलने के तत्काल बाद समस्याओं के निस्तारण के लिए संबंधित विभाग को प्रधानमंत्री संसदीय कार्यालय की ओर से पत्र भेजा जाता है, इसके बावजूद वर्षभर में सिर्फ 10 प्रतिशत आवेदन का ही निस्तारण हो पाया है।
संसदीय कार्यालय के प्रभारी शिवशरण पाठक कहते हैं, “जिला प्रशासन व राज्य सरकार प्रधानमंत्री संसदीय कार्यालय से संबंधित आवेदनों को तवज्जो नहीं दे रही है। समस्या निस्तारण में न जिला प्रशासन की कोई रुचि है और न ही राज्य सरकार की।”
वाराणसी के जिलाधिकारी प्रांजल यादव ने आईएएनएस से कहा, “ऐसी बात नहीं है। संसदीय कार्यालय के प्रतिनिधि से लगातार बातचीत होती रहती है और उनकी शिकायतों पर कार्रवाई भी होती है। अगर इस तरह की कोई शिकायत है तो मैं इसकी समीक्षा जरूर करवाऊंगा।”
रोचक यह है कि प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय के पत्र को तवज्जो न देने में नगर निगम भी पीछे नहीं है। आलम यह है कि सीवर व साफ-सफाई को लेकर करीब 178 आवेदन निगम को भेजे गए, जिनमें से अब-तक सिर्फ 15 शिकायतों का ही निस्तारण हो पाया है।
यहां के विधानसभा क्षेत्रों के भाजपा के विधायक भी कार्यालय के पत्र को तवज्जो नहीं दे रहे हैं। शहर के उत्तरी विधानसभा से जुड़े कुल 99 मामले में विधायक को भेजे गए थे, जिनमें से केवल सात का समाधान निकल पाया। शहर के दक्षिणी विधानसभा से संबंधित 19 मामले भेजे गए, जिनमें से केवल दो का समाधान निकल पाया।
कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, कैंट विधानसभा से संबंधित 63 मामले भेजे गए, जिसमें से 11 मामले का निस्तारण हो पाया। इसके अलावा रोहनिया तथा सेवापुरी विधानसभा से क्रमश: 199 व 292 मामले भेजे गए, जिनमें से क्रमश: 19 व 21 का ही समाधान निकल सका।
उल्लेखनीय है कि वाराणसी से सांसद चुनने के बाद नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने। काशी की जनता की समस्याओं के निस्तारण के लिए 20 अगस्त को रवींद्रपुरी कालोनी में प्रधानमंत्री संसदीय कार्यालय का उद्घाटन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने किया था।
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