नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को हरियाणा पुलिस को ऑल इंडिया प्री-मेडिकल प्रवेश परीक्षा (एआईपीएमटी) के प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच जल्द से जल्द पूरी करने को कहा। इसके साथ ही न्यायालय ने इस बात के संकेत दिए कि परीक्षा दोबारा आयोजित कराने को अंतिम विकल्प के तौर पर देखा जाए।
न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की युगल पीठ ने पुलिस से जांच की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा। साथ ही न्यायालय ने महाराष्ट्र, ओडिशा, बिहार, झारखंड और उन सभी राज्यों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को हरियाणा पुलिस की जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है, जहां पर उत्तर पुस्तिका भेजी गई थीं।
न्यायालय ने टेलीफोन सेवा प्रदाताओं से भी पुलिस को सहयोग करने के लिए कहा और इस पूरी प्रक्रिया में किए गए 70 मोबाइल फोन की आउटगोइंग और इनकमिंग कॉल की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा।
माता-पिता और कुछ चिकित्सकों समेत याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय से आग्रह किया था कि वह एआईपीएमटी की परीक्षा दोबारा से आयोजित कराने का आदेश दे।
इस पर न्यायालय ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने से जो अभ्यर्थी लाभान्वित हुए हैं, उनका पता लगाना मुश्किल नहीं है। अगर उनकी पहचान कर ली जाती है तो उन्हें छोड़कर परीक्षा का परिणाम घोषित किया जाएगा।
न्यायालय ने हालांकि यह बात साफ कर दी कि वह मामले की सुनवाई खुले दिमाग से कर रहा है और जांच का परिणाम आने तक इंतजार करेगा।
न्यायालय ने उनकी चिंताएं दूर करते हुए कहा, “आप सभी चाहते हैं कि दोबारा परीक्षा कराई जाए। हम यहां पर खुले दिमाग से बैठे हैं। हम इस पर सुनवाई करेंगे और फिर फैसला करेंगे।”
हरियाणा पुलिस ने गुरुवार को अपनी स्थिति रिपोर्ट में न्यायालय को बताया कि एआईपीएमटी प्रश्नपत्र लीक मामले के सरगना रूप सिंह डांगी को अभी भी गिरफ्तार करना है लेकिन उसके एक सहयोगी एस. श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर लिया गया है।
श्रीवास्तव दिल्ली के पटेल नगर इलाके में रहता था और उसने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगीं 700 बनियानों की व्यवस्था कराने में भूमिक निभाई थी। इन बनियानों का प्रयोग अभ्यर्थियों ने उत्तर जानने में किया था।
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