रोहतक, 23 मई (आईएएनएस)। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार को मांग करते हुए कहा कि या तो उनके राज्य के लिए पृथक उच्च न्यायालय का गठन किया जाए या मौजूदा पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में बराबर का प्रतिनिधित्व दिया जाए।
उन्होंने दक्षिण-पश्चिमी जिलों के लिए उच्च न्यायालय की अतिरिक्त पीठ की भी मांग की।
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित छात्र कानूनी साक्षरता मिशन कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि पृथक उच्च न्यायालय लोगों के लिए बहुत मददगार साबित होगा।
मुख्यमंत्री ने राज्य के दक्षिण पश्चिमी क्षेत्र के लिए उच्च न्यायालय की एक पीठ की स्थापना का सुझाव दिया है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा और पंजाब की विभिन्न अदालतों में क्रमश: लगभग 1.40 लाख और 1.25 लाख मामले लंबित पड़े हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हरियाणा कई पहलुओं में पंजाब से आगे है, लेकिन न्यायधीशों की नियुक्ति के संबंध में हरियाणा और पंजाब (पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में) का अनुपात 40:60 है, जो कि 50:50 होना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि अदालतों में आधारभूत सुविधाएं बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
खट्टर ने कहा कि राज्य के सभी 21 जिलों और 14 उप-मंडलों में मध्यस्थता केंद्रों की स्थापना की गई है। 21 फास्ट ट्रैक अदालतें सुचारु रूप से चल रही हैं।
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश शिवाक्ष जल वजीफदार ने कहा कि जिन लोगों को कानून की जानकारी है, उन्हें समाज के कमजोर वर्गो की सहायता करनी चाहिए।
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सतीश कुमार मित्तल ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य 10 लाख बच्चों में कानूनी जागरूकता फैलाना है।
उन्होंने कहा कि प्राधिकरण बच्चों के माध्यम से लोगों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में शिक्षित करना चाहता है।
dharmpath.com dharmpath