भोपाल, 27 मई (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में आगामी बारिश के मौसम में पैदा होने वाली विषम परिस्थियों से निपटने की तैयारियां तेज हो गई हैं। बाढ़ और अतिवृष्टि से उत्पन्न होने वाले हालात का मुकाबला करने के लिए जिला व तहसील स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएंगे।
आधिकारिक तौर पर बुधवार को बताया गया कि राज्य शासन द्वारा अतिवर्षा एवं बाढ़ की स्थिति से निपटने की पूर्व तैयारियों की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई गई। इस बैठक में समस्त संभागायुक्त एवं जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि संभावित जिले में नियंत्रण कक्ष 15 जून, 2015 तक आवश्यक रूप से खोल लिए जाएं। तहसील स्तर पर भी आवश्यकतानुसार नियंत्रण कक्ष खोला जाए। भू-अभिलेख अधीक्षक को नियंत्रण कक्ष का प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया जाए।
बैठक में कहा गया कि ऐसे क्षेत्र, जहां अक्सर बाढ़ आती है, वहां निगरानी की विशेष व्यवस्था की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर लोगों को पहुंचाने तथा ठहराने के लिए शिविर आदि के स्थानों की पहचान के साथ सम्पूर्ण योजना भी तैयार होगी। ऐसे क्षेत्र के लोगों को बाढ़ से बचाव की जानकारी देकर प्रशिक्षित किया जाएगा। इन कार्यो से पंचायतों, नगरपालिका एवं स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं को भी जोड़ा जाएगा। बाढ़ बचाव संबंधी उपकरण भी शीघ्र ठीक कराए जाएंगे।
जिलाधिकारियों से कहा गया है कि जिन जिलों में मोटर-बोट्स तथा बोट्स उपलब्ध हैं, उसकी जानकारी तत्काल राहत आयुक्त को भेजा जाए। बाढ़ की स्थिति में पुलिस बल और होमगार्ड (नगर सेना) की मदद ली जाए। स्थिति गंभीर होने पर सेना की मदद लेने का निर्णय संभागीय आयुक्त से विचार-विमर्श कर लिया जाए।
प्रदेश के बाढ़ संभावित जिलों के कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां बाढ़ आने पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है, लिहाजा जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में खाद्य सामग्री तथा जीवन-रक्षक दवाइयां पहले से उपलब्ध करा दी जाए।
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