हरिद्वार : पंडित श्रीराम शर्मा की 25वीं पुण्यतिथि 28 मई को

हरिद्वार, 27 मई (आईएएनएस)। अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य का महानिर्वाण दिवस गायत्री जयंती (28 मई) के दिन ही है।

आचार्य का जन्म 20 सितंबर 1911 को आगरा जनपद के आंवलखेड़ा ग्राम में एक संपन्न ब्राह्मण में परिवार हुआ था। उन्होंने राष्ट्रीयता की भावना को व्यक्त करने के लिए सन् 1923-24 में राजनैतिक जीवन का शुभारंभ किया।

उनके अंदर के अत्युत्साह, अदम्य जोश तथा अतुलित साहस भरे कार्यों के चलते, ‘जो कर न सकते और, उसे करके हम दिखाएंगे, जो असंभव समझा जाता है, उसे संभव हम बनाएंगे’ वाले संकल्प के साथ अविराम-अविश्रांत अपने कार्य में जुटे रहने के कारण राजनीतिक इतिहास में वे ‘श्री मत्तजी’ के रूप में विख्यात हो गए।

उन्होंने वर्ष 1928 से लेकर 1933 तक स्वतंत्रता संग्राम में अपनी सक्रिय भागीदारी भी निभाई।

जनचेतना में आध्यात्मिक जागृति के उद्देश्य से उन्होंने सन् 1938 में वसंत पंचमी से ‘अखण्ड ज्योति’ पत्रिका का प्रकाशन प्रारंभ किया।

सन् 1944 में परम वंदनीया माता भगवती देवी जी पूज्य आचार्यश्री के साधना-सहचरी के रूप में आईं। सन् 1953 में गायत्री जयंती के पावन अवसर पर गायत्री परिवार का विधिवत गठन तथा गुरुदीक्षा का क्रम प्रारंभ हुआ।

वर्ष 1956 में आचार्य ने 108 कुंडीय नरमेध यज्ञ तथा गायत्री परिवार की अधिकृत शाखाओं की घोषणा की।

7-12 जून 1957 को प्रथम अखिल भारतीय गायत्री परिवार का सम्मेलन सम्पन्न हुआ था।

गायत्री परिवार का प्रत्येक सदस्य आज भी अनुभव कर रहा है कि पूज्यवर आचार्य कहीं गए नहीं, वे आज भी अपने पास हैं और मार्गदर्शन देकर सबको आगे बढ़ा रहे हैं।

आचार्य की पुण्यतिथि पर गायत्री धाम शांति कुंज में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

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