जयपुर, 6 जून (आईएएनएस)। भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष एवं सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सी.के.प्रसाद का विचार है कि योग कोई जादू टोना नहीं है, जो सब कुछ ठीक कर देगा। विज्ञान की कसौटी पर खरा उतरे, वही योग है।
भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष शनिवार को सिरोही माउंट आबू स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय ज्ञान सरोवर हारमनी हॉल में आयोजित तीन दिवसीय नेशनल मीडिया कॉन्फ्रेंस के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने मीडिया कॉन्फ्रेंस के मुख्य विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि योग कोई जादू टोना नहीं है, जो सब कुछ ठीक कर देगा। इसे वंडर ड्रग के रूप में लिया जा रहा है। मानव जीवन, प्राणी स्वास्थ्य रक्षा आदि कई विषय क्षेत्र में योग लाभकारी है।
उन्होंने कहा कि विज्ञान की कसौटी पर जो खरा उतरे वही योग है। उन्होंने गीता में ज्ञान योग से लेकर भगवान महावीर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अहिंसा और सत्य तथा प्राचीन संस्कृति के संदर्भ में आध्यात्म व योग को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि योग दर्शन है, योग जोड़ना है, जो एकता भाईचारे का प्रतीक है। भारतीय वैदिक जीवन दर्शन में योग मानव जीवन पद्घति और सर्व कल्याण की भावना रखता है।
उन्होंने कहा कि योग से मनुष्य में अनुशासन आता है, स्थित प्रज्ञ बनता है। धैर्य, संयम आदि कई नैसर्गिक गुणों से युक्त होकर मनुष्य जीवन को उपयोगिता पूर्ण बनाता है। मीडिया की भूमिका इसमें समाज को नई दिशा व विचारधारा देने वाली होनी चाहिए।
उन्होंने योग एवं आध्यात्म का मीडिया से सकारात्मक विचारधारा के रूप में लेकर समाज के सामने नैतिक पथ प्रदर्शन की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि योगा अब ग्लोबल हो गया है। ब्रह्माकुमारी संस्था के योग के माध्यम से मानवीय स्वास्थ्य मूल्यों को जागृत करने के लिए प्रयासों की सराहना भी की।
रायपुर पत्रकारिता विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. एम.एस.परमार ने कहा कि योग और आध्यात्म मनुष्य के मन में बसता है। निर्भयता और अन्तकरण की शुद्घता से ज्ञान प्राप्ति और स्वाध्याय से एकाग्रता आती है। उन्होंने मीडिया को इसे लोक मंगलकारी की भावना के रूप में लेने को कहा।
मीडिया इनीशियेटिव इंदौर के राष्ट्रीय समन्वयक प्रोफेसर कमल दीक्षित ने सुख, आनन्द, वैभव और लम्बी उम्र की प्राप्ति के लिए आध्यात्म की विवेचना की और मीडिया को लोक संवाद कायम करने का सेतु बताया। उन्होंने मनुष्य में परिवर्तन से ज्यादा रूपान्तरण की ज्यादा जरूरत बताई जो कि योग और श्री आध्यात्म से संभव है।
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