रायपुर, 17 जून (आईएएनएस/वीएनएस)। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से आनन-फानन में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के नए भवन का शिलान्यास तो करवा लिया गया, पर शिलापट्ट पर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत का नाम नहीं होना चर्चा में है। अजीत जोगी जब छग के पहले मुख्यमंत्री थे तो उसी दौरान कांग्रेस भवन के लिए शंकरनगर में यह भूमि आबंटित की गई थी।
रायपुर, 17 जून (आईएएनएस/वीएनएस)। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से आनन-फानन में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के नए भवन का शिलान्यास तो करवा लिया गया, पर शिलापट्ट पर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत का नाम नहीं होना चर्चा में है। अजीत जोगी जब छग के पहले मुख्यमंत्री थे तो उसी दौरान कांग्रेस भवन के लिए शंकरनगर में यह भूमि आबंटित की गई थी।
राहुल गांधी ने राज्य के अपने दो दिवसीय दौरे के अंतिम दिन मंगलवार को शंकरनगर में कांग्रेस कार्यालय का शिलान्यास किया।
सूत्रों का कहना है कि पहले भी पूर्व महापौर तरुण चटर्जी ने कांग्रेस भवन का शिलान्यास कराया था। तब रामानुजलाल यादव प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे। मंगलवार को शिलान्यास के दौरान जो शिलापट्टिका सामने आई, उसमें राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, मोहसिना किदवई, बीके हरिप्रसाद, भक्त चरणदास, भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के नाम दर्ज है। परंतु शंकरनगर में इस जमीन को दिलाने वाले जोगी तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री महंत के नाम नहीं हैं। इसे लेकर राजनीति गलियारे में काफी चर्चा है।
सूत्र कहते हैं कि यह संगठन में गुटबाजी का परिणाम है। वैसे यह मामला गुटबाजी को और बढ़ाएगा ऐसा लगता है।
छग में कांग्रेस की गुटबाजी चरम पर है। प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव का एक खेमा है, तो दूसरा खेमा पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का है। दोनों खेमे एक-दूसरे को नीचा दिखाने के मौके की तलाश में रहते हैं।
यह गुटबाजी राहुल के छग दौरे के दौरान भी सामने आई। अजीत जोगी को मंच पर जाने से रोकना, फिर राहुल के हस्तक्षेप के बाद मंच पर बुलवाना, राहुल के सामने ही मंच पर जोगी, बघेल की तकरार से पार्टी के अंदर गुटबाजी स्पष्ट होती है।
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