कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला जत्था सिक्किम से रवाना

गैंगटोक, 18 जून (आईएएनएस)। नए नाथू ला मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला जत्था गुरुवार को रवाना हुआ। सिक्किम के राज्यपाल श्रीनिवास पाटिल और मुख्यमंत्री पवन चामलिंग ने इसे हरी झंडी दिखाई।

भारत और चीन ने पिछले 18 सितंबर को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए वैकल्पिक नाथू ला मार्ग के संबंध में द्विपक्षीय समझौता किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने चीन के दौरे पर बीजिंग में घोषणा की थी कि जून से नाथू ला दर्रे से यात्रा शुरू कर दी जाएगी।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मंगलवार को नई दिल्ली से 50 सदस्यों के एक जत्थे को रवाना किया था। जो बुधवार को गैंगटोक पहुंचा। हालांकि, बीमार होने के कारण 10 तीर्थयात्री आगे की यात्रा नहीं कर पाएंगे।

इधर, चामलिंग ने अपने भाषण में नरेंद्र मोदी नीत राजग सरकार को नाथू ला मार्ग को शुरू करवाने का श्रेय दिया।

नाथू ला दर्रा मार्ग समुद्र से 4,000 मीटर ऊपर है, यह भारतीय तीर्थ यात्रियों को और अधिक सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराएगा, विशेषकर बुजुर्ग लोगों को, जो उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रा की अपेक्षा बस से जा सकेंगे।

इस मार्ग का शुरू होना भारत तथा चीन के कूटनीतिक संबंध के लिए मील का पत्थर है।

नाथू ला मार्ग से पांच जत्थे में 50-50 यात्री मौजूद रहेंगे, जबकि लिपुलेख दर्रे से आठ जत्था जाएगा, प्रत्येक में 60-60 यात्री मौजूद रहेंगे।

कैलाश मानसरोवर हिंदू देवता शिव का स्थान माना जाता है। तीर्थयात्री 19,500 फुट की ऊंचाई तक यात्रा करता है।

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