नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ चुनावी हलफनामे में कथित रूप से गलत जानकारी देने के मामले में दायर एक याचिका पर यहां की एक अदालत ने बुधवार को संज्ञान लिया। अदालत ने कहा, “शिकायतकर्ता की ओर से दिए गए तर्क उचित प्रतीत होते हैं।”
महानगर दंडाधिकारी आकाश जैन ने स्मृति के खिलाफ दायर निजी शिकायत स्वीकार करते हुए मामले में सम्मन जारी करने से पहले साक्ष्य पेश करने के लिए 28 अगस्त की तारीख तय की है।
अदालत ने कहा, “शिकायतकर्ता (अहमर खान) की ओर से दिए गए तर्क उचित प्रतीत होते हैं।”
अदालत इस मामले की अगली सुनवाई (28 अगस्त) पर शिकायतकर्ता और अन्य लोगों के बयान गवाह के रूप में दर्ज करेगी।
अदालत ने एक जून को अहमर खान द्वारा दायर शिकायत पर संज्ञान लेने के संबंध में अपने आदेश को सुरक्षित रख लिया था। अहमर ने आरोप लगाया है कि स्मृति ईरानी ने लोकसभा और राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते समय निर्वाचन आयोग के समक्ष दाखिल तीन शपथ पत्रों में अपनी शैक्षिक योग्यता के संबंध में गलत जानकारी दी है।
अप्रैल माह में दायर अपनी शिकायत में अहमर ने कहा था कि अपनी शैक्षिक योग्यता के संबंध में कथित रूप से गलत शपथ पत्र देने के मामले में केंद्रीय मंत्री (स्मृति ईरानी) के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
अहमर खान के वकील के.के. मनन ने अदालत में कहा कि ईरानी ने 2004 के लोकसभा चुनाव में दायर हलफनामे में कहा था कि उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से 1996 में बी.ए. स्नातक किया था। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में दायर हलफनामे में उन्होंने बताया है कि उन्होंने 1994 में दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम (प्रथम वर्ष) की पढ़ाई की है।
11 जुलाई, 2011 को राज्यसभा के लिए गुजरात से नामांकन दाखिल करते समय एक अन्य हलफनामे में स्मृति ने बताया था कि उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्राचार माध्यम से बी.कॉम (प्रथम वर्ष) की पढ़ाई की है।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, “ईरानी द्वारा दिए गए शपथपत्रों से यह साफ है कि उनकी कोई एक शैक्षिक योग्यता ही सही होगी।”
याचिकाकर्ता ने कहा कि ईरानी ने अपनी संपत्ति के बारे में भी गलत जानकारी दी। याचिकाकर्ता ने कहा कि ईरानी के खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अपराध की बात स्पष्ट होती है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
dharmpath.com dharmpath