वाशिंगटन, 7 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका के साउथ कैरोलिना प्रांत की भारतीय-अमेरिकी गवर्नर निक्की हेली ने प्रांत के स्टेट हाउस ग्राउंड से कन्फेडरेट बैटल फ्लैग को हटाने के पक्ष में मतदान करने के लिए राज्य सीनेट की प्रशंसा की।
वाशिंगटन, 7 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका के साउथ कैरोलिना प्रांत की भारतीय-अमेरिकी गवर्नर निक्की हेली ने प्रांत के स्टेट हाउस ग्राउंड से कन्फेडरेट बैटल फ्लैग को हटाने के पक्ष में मतदान करने के लिए राज्य सीनेट की प्रशंसा की।
साउथ कैरोलिना सीनेट में मतदान उस बर्बर घटना के तीन सप्ताह बाद हुआ, जिसमें एक श्वेत नागरिक ने ऐतिहासिक गिरजाघर में नौ अफ्रीकी-अमेरिकी नागरिकों को गोलियों से भून डाला था।
रिपब्लिकन पार्टी की सदस्य हेली ने सबसे पहले अलगाववादी झंडे (कन्फेडरेट बैटल फ्लैग) को हटाने की पहल की थी, जब यह खुलासा हुआ था कि श्वेत हमलावर डीलन रूफ ने वारदात के समय एक हाथ में बंदूक और दूसरे हाथ में यही झंडा थाम रखा था। हेली ने सोमवार को राज्य प्रतिनिधिसभा से भी सीनेट का अनुसरण करने का अनुरोध किया।
स्टेट हाउस ग्राउंड में 50 वर्षो से भी ज्यादा समय से फहराए जा रहे गुलामी युग के झंडे को हटाने के प्रस्ताव वाले विधेयक को रिपब्लिकन बहुल सीनेट में तीन के मुकाबले 37 मत मिले। सीनेट के पुनर्विचार के बाद मंगलवार को यह विधेयक प्रतिनिधिसभा में मतदान के लिए पेश होगा।
हेली ने कहा, “साउथ कैरोलिना की सीनेट ने आज का दिन ऐतिहासिक बना दिया है। दोनों पार्टियों ने बहुमत से साथ मिलकर एकता का परिचय दिया, जो हमारे देश को एकजुट करता है और हमें सही राह पर आगे ले जाता है।”
सीएनएन के मुताबिक, सोमवार को राज्य सीनेट में विधेयक पर चर्चा के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी झंडे को हटाए जाने या नहीं हटाने के पक्ष में अपना समर्थन देने के लिए सीनेट भवन के बाहर एकत्र हुए।
सीएनएन के ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक, 57 फीसदी अमेरिकी कन्फेडेरेट बैटल झंडे को नस्ली भेदभाव के प्रतीक के बजाय ‘दक्षिण के गौरव’ के प्रतीक के रूप में देखते हैं। वर्ष 2000 में भी 59 फीसदी अमेरिकी नागरिकों ने स्वीकार किया था कि वे झंडे को गौरव के प्रतीक के रूप में देखते हैं।
हेली ने समाचार चैनल ‘एनबीसी’ से कहा, “झंडे को हटाने की पहल तो शुरुआत भर है, इसका अंत यहीं नहीं होता।”
समाचार पत्र ‘न्यूयार्क टाइम्स’ ने अपने संपादकीय में लिखा, “गृह युद्ध का खात्मा हो रहा है। साउथ कैरोलिना के सीनेट का झंडे को हटाए जाने के पक्ष में किया गया मतदान कालातीत है। अब प्रतिनिधिसभा को अपना फैसला सुनाना है।”
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