भोपाल/नई दिल्ली, 8 जुलाई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपे जाने को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुरोध पत्र पर जबलपुर उच्च न्यायालय ने सुनवाई 20 जुलाई तक के लिए टाल दिया। इसके बाद शिवराज ने बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय से घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का आग्रह किया।
राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्पेंद्र कौरव ने बुधवार को आईएएनएस को बताया, “मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से व्यापमं मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का अनुरोध किया गया था। इस मामले पर बुधवार को न्यायालय ने कहा कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में है, लिहाजा वह सुनवाई की तारीख बढ़ता है, अब इस आवेदन पर 20 जुलाई को सुनवाई करेगा।”
कांग्रेस सहित कई अन्य लोगों द्वारा व्यापमं मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई से कराने की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई हैं। इन याचिकाओं पर गुरुवार नौ जुलाई को सुनवाई होगी।
राज्य में व्यापमं घोटाले से जुड़े लोगों की हो रही मौतों को लेकर मचे हंगामे के बाद मुख्यमंत्री चौहान ने मंगलवार को सीबीआई जांच के लिए उच्च न्यायालय से पत्र लिखने का ऐलान किया था और शाम को यह अनुरोध पत्र न्यायालय में दाखिल भी कर दिया गया था।
राज्य में व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) वह संस्था है जो इंजीनियरिंग कालेज, मेडीकल कॉलेज में दाखिले से लेकर वे सारी भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है, जो मप्र लोक सेवा आयोग आयोजित नहीं करता है। इन दाखिलों और भर्तियों में हुई गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद जुलाई 2013 में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इस मामले में अब तक 2100 गिरफ्तारियां हो चुकी है।
चौहान ने नई दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, “मामले की सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई होने वाली है। मैं इस मामले में सीबीआई से जांच कराने का आग्रह करता हूं।”
उन्होंने कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) इस्तीफे की मांग खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस उनका इस्तीफा तब से मांग रही है जब वह मुख्यमंत्री बने थे।
चौहान ने दावा किया कि वह पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने गहनता से मामले की जांच शुरू कराई थी।
चौहान ने कहा, “हमारी सरकार ने अभी तक जिम्मेदारी से जांच की। इसके बाद भी अगर किसी को कोई संदेह है तो सीबीआई जांच से सच सामने आने देना चाहिए। सरकार सीबीआई जांच के लिए तैयार है और जो भी इस मामले में दोषी हैं उन्हें सजा मिलनी चाहिए।”
चौहान पर हमला जारी रखते हुए कांग्रेस ने इस मामले से जुड़ी मौतों और रैकेट के लिए अलग से जांच की मांग की।
कांग्रेस के नेता आर.पी.एन. सिंह ने नई दिल्ली में कहा, “दोनों जांच सीबीआई द्वारा कराई जानी चाहिए, और दोनों की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निगरानी की जानी चाहिए।”
वहीं लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती ने व्यापमं घोटाले पर शिवराज सिंह से इस्तीफे की मांग की।
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि गवाहों की लगातार हो रही मौत से सरकार की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है और चौहान को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।
वहीं इस मामले की अहम कड़ी मानी जा रही झाबुआ की नम्रता डामोर की मौत के बाद शव का पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक ने बुधवार को कहा है कि नम्रता की मौत नाक, मुंह और गला दबाने से हुई थी।
चिकित्सक डॉ. बी. बी. पुरोहित ने मीडिया से कहा, “नम्रता की मौत नाक, मुंह और गला एक साथ दबाने से हुई थी, और उसके शरीर पुर नाखून के निशान भी मिले थे।”
उज्जैन के पुलिस अधीक्षक मनोहर सिंह वर्मा ने बुधवार को मीडिया से कहा, “नम्रता की मौत की जांच हुई थी। जांच में पता चला था कि मौत दुर्घटनावश हुई थी। अगर कोई नया तथ्य सामने आता है तो पुलिस जांच के लिए तैयार है।”
इधर दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने समाचार चैनल के दिवंगत पत्रकार अक्षय सिंह के विसरा की बुधवार को हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच शुरू की, जबकि अस्पताल ने विसरा की टॉक्सिकोलॉजी जांच करने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि ऐसा करने का उसे अधिकार नहीं है।
एम्स ने दिवंगत पत्रकार के विसरा की टॉक्सिकोलॉजी जांच के लिए मध्य प्रदेश पुलिस से उसे केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) भेजने का आग्रह किया है, जिसके बाद यह पता चलेगा कि कहीं उन्हें जहर तो नहीं दिया गया था।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मृतक पत्रकार की बहन को सरकारी नौकरी की पेशकश की है। संभावना है कि शिवराज चौहान भी अक्षय के परिवार से मिल सकते हैं।
dharmpath.com dharmpath