याकूब की याचिका खारिज, 30 जुलाई को फांसी (राउंडअप)

नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को मार्च 1993 मुंबई बम विस्फोटों के दोषी याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमेंफैसले में सुधार की मांग की गई थी। इसके साथ ही 30 जुलाई को उसे फांसी पर चढ़ाए जाने का रास्ता साफ हो गया।

नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को मार्च 1993 मुंबई बम विस्फोटों के दोषी याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमेंफैसले में सुधार की मांग की गई थी। इसके साथ ही 30 जुलाई को उसे फांसी पर चढ़ाए जाने का रास्ता साफ हो गया।

मुंबई में 1993 में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के लिए दोषी ठहराए गए मेमन को फांसी की सजा सुनाई गई थी।

सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एच.एल. दत्तू की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने मेमन की याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में मेमन ने मृत्युदंड बरकरार रखने के न्यायालय के पूर्ववर्ती फैसले को चुनौती दी थी।

सूचना के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने 30 जुलाई को नागपुर सेंट्रल जेल में मेमन की फांसी का रास्ता साफ कर दिया है।

मेमन ने दलील दी थी कि वह साल 1996 से ही सिजोफ्रेनिया का मरीज रहा है और जेल में लगभग 20 साल का समय बिता चुका है। एक ही अपराध के लिए उसे मौत की सजा तथा आजीवन कारावास की सजा नहीं दी जा सकती।

उसने सजा को रोकने के लिए सर्वोच्च न्यायालय से 21 मार्च, 2013 के फैसले की समीक्षा करने की मांग की थी। मुंबई में सिलसिलेवार ढंग से हुए कुल 13 बम विस्फोटों में 257 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 712 लोग घायल हुए थे।

वह 100 दोषियों की सूची में शामिल है, जिनमें कई वांछित फरार की सूची में रखे गए हैं, जिसमें उसका भाई टाइगर मेमन तथा माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम शामिल है।

याकूब मेमन तथा 11 अन्य को मौत की सजा, 20 को आजीवन कारावास तथा संजय दत्त सहित 68 अन्य को अलग-अलग समय की जेल की सजा सुनाई गई है।

सुनवाई व सजा सुनाने वाले टाडा न्यायालय के विशेष न्यायाधीश पी.डी.कोडे ने 22 साल बाद सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को एक सांत्वना करार दिया और उनके लिए जीत जो कानून के शासन में विश्वास करते हैं।

कोडे ने मुंबई ने कहा, “फैसला यह दर्शाता है कि आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होना लाभकारी कारोबार नहीं है।”

विशेष लोक अभियोजक उज्‍जवल निकम ने कहा, “यह ऐतिहासिक फैसला है। सर्वोच्च न्यायालय ने षड्यंत्रकारी व प्लांटर के बीच भूमिका के अंतर को स्पष्ट किया है और वे अधिक से अधिक सजा के लायक हैं।”

निकम ने कहा, “कानून के तहत मौत की सजा एक प्रभावी उपाय है। इस मामले में यह निवारक के रूप में काम करेगा।”

तत्कालीन विशेष न्यायाधीश कोडे ने 27 जुलाई, 2007 को जब मौत की सजा सुनाई, तो वह कोर्टरूम में जंगली जानवर की तरह चीखा था।

पेशे से चार्टर अकाउंटेंट याकूब मेमन (53) मुंबई में अपने भाई टाइगर मेमन का वित्तीय हिसाब-किताब रखता था।

मेमन ने विस्फोटों के षड्यंत्र रचने, सह-सहयोगी मूलचंद शाह और उसकी कंपनी के माध्यम से विस्फोट के लिए वित्तीय व्यवस्था करने तथा छह अन्य आरोपियों को दुबई तथा उसके बाद पाकिस्तान जाने की व्यवस्था करने के लिए विमान के टिकट की व्यवस्था करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उसे विस्फोट में इस्तेमाल किए गए वाहन को खरीदने तथा हथियार व विस्फोटक रखने का भी दोषी पाया गया।

विस्फोट के पहले याकूब मेमन सहित उसका पूरा परिवार मुंबई से फरार हो गया था।

कोडे ने कहा कि मार्च 1993 में आतंकवादी विस्फोट भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा आतंकवादी हमला है, जिसमें एक ही समय में 13 जगहों को निशाना बनाया गया।

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