तिरुवनंतपुरम, 24 जुलाई (आईएएनएस)। केरल विधानसभा में विपक्ष ने शुक्रवार को सदन के अध्यक्ष के फैसले पर विरोध जताने के लिए विधानसभा से बहिर्गमन किया। विपक्ष महाधिवक्ता के.पी. धंदापानी के खिलाफ उच्च न्यायालय की टिप्पणी पर चर्चा की मांग कर रहा था।
विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन ऐसे समय में किया, जब केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने एक मामले की सुनवाई कर रहे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की गुरुवार की टिप्पणी की आलोचना की और महाधिवक्ता के कामकाज में पूरा भरोसा जताया।
इससे पहले विपक्षी वामदल विधायक मैथ्यू टी. थॉमस ने धंदापानी के खिलाफ उच्च न्यायालय की टिप्पणी पर चर्चा करने के उद्देश्य से स्थगन प्रस्ताव की इजाजत मांगी।
थॉमस ने कहा कि न्यायालय ने महाधिवक्ता पर सख्त टिप्पणी की है। साथ ही उन्होंने कहा कि चूंकि महाधिवक्ता के दफ्तर में उचित रूप से कामकाज नहीं चल रहा है, इसीलिए उसे बंद कर देना चाहिए।
उन्होंने कहा, “न्यायालय की टिप्पणी के कुछ मिनट बाद ही चांडी ने महाधिवक्ता का बचाव किया और उन्हें क्लीन चिट दे दी, पूरे राज्य ने यह देखा। मुख्यमंत्री के इस कदम से हम सभी चकित हैं।”
चांडी ने इसके बाद न्यायालय और विपक्षी वाम मोर्चा दोनों पर हमला बोला।
उन्होंने कहा, “जब से मौजूदा महाधिवक्ता ने पदभार संभाला है केरल सरकार को एक भी मामले में हार का सामना नहीं करना पड़ा। वाम सरकार के कार्यकाल (2006-11) के दौरान राज्य की पैरोकारी करने के लिए बहुत महंगे वकील रखे गए थे। लेकिन अभी तक हमें केवल दो बार वरिष्ठ वकीलों की आवश्यकता पड़ी, क्योंकि हमारे महाधिवक्ता बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और वे सरकार के लिए सभी मामलों में जीत दर्ज कर रहे हैं।”
चांडी ने विपक्ष से कहा कि वह तथ्यों की सही जानकारी रखे।
सदन में विपक्ष के नेता वी.एस. अच्युतानंदन ने कहा कि उच्च न्यायालय की टिप्पणी चांडी सरकार के गाल पर तमाचा है। मामले में चर्चा के लिए अनुमति न देने के अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए विपक्ष को सदन से बहिर्गमन करना पड़ा।
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