नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। किसानों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे समूह ‘स्वराज अभियान’ के संस्थापक-सदस्य योगेंद्र यादव को सोमवार आधी रात के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने पुलिस पर उन्हें ‘घसीटने’ और उनके साथ ‘मारपीट’ का आरोप लगाया। पुलिस ने हालांकि इससे इंकार किया है।
योगेंद्र और उनके साथी कार्यकर्ताओं को सोमवार देर रात करीब एक बजे गिरफ्तार किया गया, वे तब जंतर-मंतर पर भूमि विधेयक और फसल के नुकसान से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की मांग कर रहे थे।
योगेंद्र के सहयोगी अनिल कुमार मौर्य ने आईएएनएस को बताया कि उन्होंने सोमवार तक प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त से इजाजत ली थी। उनसे कहा गया था कि अनुमति आगे बढ़वाई जा सकती है।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि योगेंद्र को सिर्फ रविवार और सोमवार को प्रदर्शन करने की इजाजत दी गई थी, लेकिन उन्होंने मंगलवार तड़के भी बिना इजाजत के प्रदर्शन जारी रखा।
पुलिस उपायुक्त विजय सिंह ने आईएएनएस को बताया कि जब पुलिस ने योगेंद्र को अपना प्रदर्शन खत्म करने के लिए कहा, तो उन्होंने पुलिस को एक अन्य पत्र लिख इसे स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या (शुक्रवार) तक जारी रखने की इजाजत मांगी।
सिंह ने कहा, “हमने स्वतंत्रता दिवस और आतंकवादी धमकियों के मद्देनजर उन्हें प्रदर्शन जारी रखने की इजाजत नहीं दी। लेकिन उन्होंने पुलिस को चुनौती दी और अपना विरोध-प्रदर्शन जारी रखा। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और संसद मार्ग पुलिस थाने में रखा गया।”
सिंह ने कहा कि योंगेद्र द्वारा लगाए गए आरोप झूठे हैं। उन्होंने कहा, “कोई बदसलूकी नहीं की गई। हमारे पुलिस अधिकारियों ने उन्हें सिर्फ प्रदर्शन खत्म करने के लिए समझाया। प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट नहीं की गई थी।”
उन्होंने कहा कि योगेंद्र और 85 अन्य प्रदर्शनकारियों को मंगलवार शाम तक हिरासत में रखा जाएगा, क्योंकि उन लोगों ने प्रधानमंत्री आवास तक जुलूस निकालने की चेतावनी दी है।
वहीं, योगेंद्र का कहना है कि पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी की। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मुझे घसीटा गया, मेरे साथ मारपीट की गई, मुझे धक्का देकर पुलिस वैन में बिठाया गया, लेकिन मुझे अब तक अपना गुनाह नहीं पता चला।”
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ट्विटर पर इस पुलिस कार्रवाई की निंदा की।
केजरीवाल ने लिखा, “मैं दिल्ली पुलिस द्वारा योगेंद्र जी के साथ किए गए दुर्व्यवहार की पुरजोर निंदा करता हूं। वे शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे। यह उनका मौलिक अधिकार है।”
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