लुधियाना, 13 अगस्त (आईएएनएस)। एक छोटे से कारोबार से शुरू कर देश के साइकिल उद्योग के जनक के रूप में स्थापित हो जाने वाले हीरो साइकिल्स के संस्थापक ओम प्रकाश मुंजाल का यहां गुरुवार को निधन हो गया। यह जानकारी पारिवारिक सूत्रों ने दी।
86 वर्षीय मुंजाल को लुधियाना के दयानंद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल के हीरो हर्ट इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया था, जहां उनका निधन हो गया।
पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि हीरो साइकिल के जरिए उन्होंने लुधियाना को वैश्विक उद्योग जगत के नक्शे पर ला खड़ा किया।
उन्होंने कहा कि मुंजाल का सामाजिक क्षेत्र में भी काफी योगदान रहा और उन्होंने जरूरतमंदों की मदद के लिए स्कूल और कॉलेज खोले।
बादल ने कहा, “पंजाब ने अपना एक पुत्र खो दिया, जिसे हमेशा कठिन मेहनत और समर्पण के लिए याद किया जाएगा।”
उन्होंने कहा, “यह मेरी निजी क्षति है, लेकिन मुझे विश्वास है कि पंजाब के इस महान उद्यमी का जीवन आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।”
मुंजाल ने 1944 में अपने भाई के साथ साइकिल के कल-पुर्जो के डीलर के रूप में कारोबार शुरू किया था, जिसे उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी साइकिल निर्माता कंपनी में परिणत कर दिया।
हीरो साइकिल्स का कारखाना 1956 में लुधियाना में स्थापित हुआ था। तब उसकी उत्पादन क्षमता रोजाना 25 साइकिलों की थी। अब इसमें रोज 19,500 साइकिलें बनती हैं।
हीरो साइकिल को 1986 में दुनिया की सबसे अधिक साइकिल बनाने वाली कंपनी के रूप में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किया गया था। देश के साइकिल बाजार में कंपनी की करीब 40 फीसदी हिस्सेदारी है।
फैंसी कारों, विमानों और प्रौद्योगिकी आधारित संचार साधनों के जमाने मं भी मुंजाल ने कभी मोबाइल फोन इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कभी ई-मेल नहीं भेजे और न ही कॉनफरेंस कॉल में उनका विश्वास था।
लेखिका और प्रेरक वक्ता प्रिया कुमार ने मुंजाल की जीवनी में लिखा है कि मुंजाल बंधुओं ने साइकिल के पुर्जे बेचने शुरू किए और दसवीं पास ओम प्रकाश (ओपी) को शहर-शहर घूम कर ठेका लेने का काम सौंपा गया था।
ओपी रेलगाड़ी की तीसरी श्रेणी में सफर करते थे और सस्ते साधारण होटलों में ठहरते थे। एक समय ऐसा भी आया कि उनकी कंपनी को साइकिल के घटिया किस्म के पार्ट की आपूर्ति हो जाने से लगभग 80 फीसदी कारोबार बंद हो गया।
मुंजाल बंधुओं ने परिवार और मित्रों से कर्ज लेकर नए सिरे से कारोबार शुरू किया।
उन्हीं दिनों पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों ने एक भाई को कहा कि साइकिल पार्ट बेचना छोड़कर साइकिल की एसेंबलिंग करना शुरू करो।
इसके बाद हीरो ब्रांड हीरो साइकिल्स में बदल गया और फिर मुंजाल बंधुओं ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
इतनी सफलता के बाद भी उन्होंने सरलता नहीं छोड़ी। आखिरी समय तक ओपी अपने बड़े भाइयों के पैर छूकर उन्हें प्रणाम करते रहे।
एक बार उन्हें लगा कि उनकी साइकिलों की गुणवत्ता विश्वस्तरीय नहीं है। तब उन्होंने अपनी सभी साइकिलें बाजार से वापस मंगवा ली और बेहतर साइकिलों की आपूर्ति की।
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