महिला ने लगभग 15 मिनट तक तेंदुए से संघर्ष किया। वनकर्मियों ने पहुंचकर बालक का इलाज कराया है, तेंदुए के हमले से गांव में दहशत है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के निशानगाड़ा रेंज अंतर्गत आजमगढ़पुरवा कारीकोट गांव निवासी अरुण (7) पुत्र चंदन मंगलवार तड़के शौच के लिए गया था। मां चंपा देवी कुछ दूरी पर खड़ी थी। इसी दौरान बांस की झाड़ में पहले से बैठे तेंदुए ने बालक पर हमला कर दिया। तेंदुए के हमले को देखकर मां अपने बच्चे को बचाने के लिए खुद भी हमलावर हो गई। उसने पास पड़ी लकड़ी और ईंट से तेंदुए पर हमला बोल दिया।
लगभग 15 मिनट तक संघर्ष करने और उसकी चीख-पुकार सुनकर ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर मशाल जलाते हुए हांका लगाया। ग्रामीणों को जुटते देख तेंदुआ बच्चे को छोड़कर जंगल में फरार हो गया। मासूम अरुण की पीठ, पेट और बांह पर तेंदुआ ने नोंचा है। सूचना पाकर रेंजर निशानगाड़ा गयादीन, फॉरेस्ट गार्ड रामसमुझ तिवारी पहुंचे।
उन्होंने अरुण को सुजौली के सीएचसी में भर्ती कराया। रेंजर ने बताया कि इलाज के लिए 1200 रुपये अहेतुक सहायता दी गई है। लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, वह मादा तेंदुआ थी और अपने शावकों के साथ आई थी।
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