चेन्नई/नई दिल्लीन, 2 सितम्बर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की ट्रेड यूनियन और कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ बुधवार को देशभर में लाखों बैंक और जीवन बीमा कर्मियों के हड़ताल पर रहने की वजह से वित्तीय सेवाएं प्रभावित रहीं।
ऑल इंडिया बैंक एंप्लॉईज एसोसिएशन (एआईईबीए) के महासचिव सी.एच. वेंकटचलम ने चेन्नई में आईएएनएस को बताया, “शुरुआती जानकारी के मुताबिक, देशभर में हड़ताल जबर्दस्त तरीके से शुरू हुई। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई), राष्ट्रीयकृत बैंकों, पुराने निजी क्षेत्र के बैंकों, सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के कर्मी हड़ताल में भाग ले रहे हैं।”
वेंकटचलम के मुताबिक, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में हड़ताल सफल रही।
देशभर में करीब 5,00,000 बैंक कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल में शामिल हुए। करीब 75,000 बैंक शाखाओं में कामकाज ठप्प है।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) के यूनियन हड़ताल में भाग नहीं ले रहे हैं।
ऑल इंडिया इंश्योरेंस एंप्लॉईज एसोसिएशन (एआईआईईए) के उपाध्यक्ष जे. गुरुमूर्ति ने आईएएनएस को बताया, “भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और चार सरकारी गैर-जीवन बीमा कंपनियों में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी प्रमुख मान्यताप्राप्त यूनियन हड़ताल में भाग ले रहे हैं।”
करीब 1,00,000 एलआईसी कर्मचारियों के हड़ताल पर होने का अनुमान है।
गैर-जीवन बीमा क्षेत्र की यूनियनें मजदूरी समझौते के त्वरित निष्कर्ष, पदोन्नति नीति को अंतिम रूप देने, आउसोर्टिग समाप्त करने सहित अन्य मांगें पूरी करने की मांग कर रही हैं।
देश के परिवहन यूनियन भी प्रस्तावित सड़क परिवहन एवं सुरक्षा विधेयक को लेकर हड़ताल पर है।
वेंकटचलम ने कहा, “जिला बैंकों के अलावा सभी 52 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक हड़ताल में शामिल हैं।”
उन्होंने कहा, “इसके अलावा आईडीबीआई, नाबार्ड जैसे अन्य प्रमुख बैंकों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल रहे।”
एआईईबीए महासचिव ने कहा, “एसबीआई और इंडियन ओवरसीज बैंक को छोड़कर अन्य सभी बैंक हड़ताल में शामिल हैं।”
10 केंद्रीय श्रमिक संघों की 12 सूत्री मांगों के समर्थन में हड़ताल आयोजित की गई है। बैंकिंग सेक्टर के 14 संगठन भी 12 सूत्री मांगों के अलावा अपनी अन्य मांगों के साथ हड़ताल पर हैं।
वेंकटचलम ने कर्मचारियों के अधिकारों एवं सुविधाओं पर बढ़ते हमलों और नियोक्ताओं की रियायतें बढ़ाए जाने की शिकायत करते हुए कहा कि खुलेआम नियोक्ताओं के पक्ष में श्रम कानूनों में संशोधन किया जा रहा है।
dharmpath.com dharmpath