हालांकि चीनी महिला वॉलीबॉल टीम पिछले 11 वर्ष के बाद कोई मेजर खिताब जीतने में सफल हुई है।
इससे पहले चीनी महिला वॉलीबॉल टीम ने एथेंस ओलम्पिक-2004 में स्वर्ण पदक हासिल किया था।
चीनी टीम कभी दुनिया की सिरमौर टीम हुआ करती थी। 1981 से 1986 के बीच अजेय रही चीनी महिला वॉलीबॉल टीम ने दो बार विश्व चैम्पियनशिप खिताब जीता, दो बार विश्व कप विजेता और एक बार ओलम्पिक चैम्पियन रहीं।
इस बीच चीनी टीम कई उतार-चढ़ाव से गुजरी। स्वर्णिम दौर की खिलाड़ियों ने संन्यास ले लिया और युवा खिलाड़ियों को अपनी विरासत कायम रखने में काफी मुश्किल आई। अनुभव रहित चीनी महिलाएं विश्व चैम्पियनशिप-2010 में 10वां स्थान तथा लंदन ओलम्पिक-2012 में पांचवां स्थान हासिल कर सकीं।
1981 और 1985 में विश्व कप विजेता टीम की कप्तान रहीं तथा ‘आयरन हैमर’ के नाम से मशहूर जेनी लैंग पिंग 2013 में चीनी टीम की मुख्य कोच बनीं। मुख्य कोच बनते ही लैंग पिंग ने जोखिम भरा कदम विश्वास के साथ उठाते हुए टीम में कई युवा खिलाड़ियों को शामिल किया।
युवा खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने के साथ-साथ लैंग पिंग ने उनके बीच टीम में जगह बनाए रखने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा भी रखी। लैंग पिंग की इसी रणनीति के चलते टीम को झू टिंग, यूआन शिन्यू, हुई रुओकी, लिन ली, शेन जिंगसी जैसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी मिलीं।
लैंग पिंग की टीम ने अंतत: गत चैम्पियन मेजबान जापान को उन्हीं की धरती पर हराकर खिताब अपने नाम किया।
लैंग पिंग की टीम के पास अगले वर्ष रियो ओलम्पिक में एक बार फिर इतिहास दोहराने का मौका होगा। विश्व कप जीतने के साथ ही चीनी टीम ने रियो ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई कर लिया है।
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