मोदी की मिस्र, जॉर्डन, स्वीडन के नेताओं से मुलाकात

न्यूयार्क, 26 सितम्बर (आईएएनएस)। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जॉर्डन के सुल्तान अब्दुल्ला द्वितीय, मिस्र के राष्ट्रपति अब्दल फतह अल सीसी और स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टीफेन लोवेन के साथ शुक्रवार को अलग-अलग मुलाकात की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप के मुताबिक, तीनों नेताओं से बातचीत में आईएसआईएस और अन्य कट्टरपंथी गुटों से खतरे पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कट्टरपंथ से लड़ने के उपायों पर बात की।

मोदी ने अब्दुल्ला से होटल मैंडरीन में मुलाकात की, जहां वह ठहरे हुए हैं। मोदी ने वाल्डोर्फ एस्टोरिया होटल से निकल कर पहली बार किसी नेता से मिलने के लिए उसके होटल गए हैं।

स्वरूप के मुताबिक, सुल्तान ने कहा कि आईएसआईएस दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा है। मोदी ने कहा कि कट्टरपंथ से लड़ने के लिए आतंकवाद को धर्म से अलग करके देखना होगा। मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ व्यापक संकल्प की भी वकालत की जो कि आतंकवाद की परिभाषा पर कई देशों के विरोध जताने के कारण लंबित है।

अब्दुल्ला ने सुरक्षा परिषद में सुधारों का समर्थन करते हुए भारत की स्थायी सदस्यता के लिए समर्थन की भी बात की।

कट्टरपंथ और आतंकवाद के अलावा मोदी और अल सीसी ने आर्थिक मुद्दों पर भी चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र में द्विपक्षीय वार्ता के दौरान मोदी को बताया गया कि हाल ही में निर्मित नई स्वेज नहर ने भारत को निवेश का अवसर दिया है।

मोदी से मुलाकात के लिए वॉल्डोर्फ एस्टोरिया आए लोफवेन ने उनसे आईएसआईएस और कट्टरपंथ पर वार्ता की।

मोदी ने स्वीडन को उनके ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्किल्स इंडिया’ योजनाओं में शामिल होने का न्योता दिया। दोनों देश जिन क्षेत्रों में आपसी सहयोग कर सकते हैं, उनमें मोदी ने रेलवे का नाम लिया।

सुरक्षा परिषद सुधार के मामले में मोदी को स्थायी सदस्यता के लिए स्वीडन का फिर से समर्थन प्राप्त हुआ।

मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में छोटे से कैरिबियाई द्वीप सेंट लूसिया के प्रधानमंत्री केन्नी एंथोनी से भी मुलाकात की। एंथोनी ने लूसिया जैसे छोटे देशों को महत्व देने के लिए मोदी की प्रशंसा की। भारत सेंट लूसिया सहित 52 सदस्यीय स्मॉल आईलैंड डेवलपिंग स्टेट्स ग्रुप के साथ कूटनीतिक और विकासशीलता की सक्रिय कोशिशें कर रहा है।

साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस अनस्तेसियादेस से मुलाकात के दौरान मोदी ने साइप्रस और भारत के गहरे रिश्ते की बात की। अनस्तेसियादेस और मोदी ने इतने वर्षों से दोनों देशों के एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की सराहना की।

अनस्तेसियादेस ने कहा कि दोनों देश जहाजरानी और उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में एक-दूसरे की सहायता कर सकते हैं।

साइप्रस के यूरोपीय संघ का सदस्य होने के नाते मोदी ने इस गुट के साथ संबंध बढ़ाने के बारे में बात की, लेकिन यूरोपीय संघ के साथ भारत की कुछ व्यापारिक मुश्किलों का भी उन्होंने जिक्र किया। मोदी ने एक निरीक्षण की रपट के आधार पर 700 दवाओं को यूरोपीय संघ द्वारा रोके जाने का एक उदाहरण दिया।

अनस्तेसियादेस ने भी सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए समर्थन देने की बात कही।

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