भारत 23 विदेशी उपग्रह प्रक्षेपित करेगा

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 28 सितम्बर (आईएएनएस)। एंट्रिक्स कॉरपोरेशन ने सोमवार को यहां कहा कि भारत ने 23 विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 28 सितम्बर (आईएएनएस)। एंट्रिक्स कॉरपोरेशन ने सोमवार को यहां कहा कि भारत ने 23 विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

एंट्रिक्स कॉरपोरेशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की व्यावसायिक शाखा है।

एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, “23 विदेशी उपग्रहों में से दो का प्रक्षेपण अलग-अलग रॉकेट से किया जाएगा। बाकी 21 उपग्रहों का प्रक्षेपण एक बड़े भारतीय रॉकेट से किया जाएगा।”

उन्होंने कहा कि इसरो जल्द ही सिंगापुर के छह उपग्रहों का प्रक्षेपण करने वाला है, जिसका कुल वजन लगभग 660 किलोग्राम है।

उनके मुताबिक, उनमें सबसे बड़ा एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जिसका वजन 410 किलोग्राम है। दो माइक्रो उपग्रह हैं, जिनका वजन क्रमश: 130 किलोग्राम व 80 किलोग्राम है।

बाकी तीन नैनो उपग्रह हैं, जिनका कुल वजन 30 किलोग्राम है।

एंट्रिक्स कॉरपोरेशन के अधिकारियों के मुताबिक, इसरो साल 2016 के पहले अमेरिका के पांच छोटे उपग्रह भी छोड़ेगा।

एंट्रिक्स कॉरपोरेशन ने अमेरिका के साथ नौ छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें से चार का प्रक्षेपण सोमवार को एस्ट्रोसैट के साथ किया गया। एस्ट्रोसैट भारत का पहला खगोलीय उपग्रह है।

भारत अब तक 51 विदेशी उपग्रहों का सशुल्क प्रक्षेपण कर चुका है।

इसरो के अध्यक्ष ए.एस.किरण कुमार ने संवाददाताओं से कहा, “अमेरिका के साथ हमारे संबंध में अधिक से अधिक वृद्धि हो रही है।”

आगामी प्रक्षेपण के बारे में उन्होंने कहा कि ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) का अगला प्रक्षेपण पूरी तरह वाणिज्यिक होगा।

उन्होंने कहा कि भारत इस साल नवंबर में यहां से एरियन रॉकेट के माध्यम से संचार उपग्रह जीसैट-15 का प्रक्षेपण करने जा रहा है। एरियन यूरोप का भारी प्रक्षेपण यान है। साथ ही दो नौवहन उपग्रहों का प्रक्षेपण भी किया जाएगा।

कुमार के मुताबिक, सभी सातों नौवहन उपग्रह भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली के हिस्सा हैं, जिन्हें 2016 में कक्षा में स्थापित करना है।

प्रधानमंत्री द्वारा घोषित दक्षेस उपग्रह के बारे में पूछने पर इसरो अध्यक्ष ने कहा कि व्यवस्था के प्रारूप के लिए श्रीलंका ने सहमति जता दी है।

कुमार ने कहा, “यह दो टन भारी उपग्रह होगा, जिसमें 12 ट्रांसपोंडर लगे होंगे। दक्षेस के प्रत्येक देश को एक ट्रांसपोंडर दिया जाएगा, जिसके माध्यम से वे जरूरत के आंकड़े प्राप्त कर सकेंगे। उपग्रह का प्रक्षेपण साल 2016 के अंत तक होगा।”

भारत के एक साल पुराने मार्स ऑर्बिटर मंगलयान द्वारा भेजे गए आंकड़े और उनपर शोध के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आंकड़ों को इच्छुक शोधकर्ताओं के साथ साझा किया जाएगा।

उनके मुताबिक, प्रत्येक ढाई दिन पर मंगलयान चार तस्वीरें लेता है और इसरो को भेज देता है।

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