हैदराबाद, 29 सितम्बर (आईएएनएस)। तेलंगाना में किसानों द्वारा लगातार की जा रही खुदकुशी का मुद्दा मंगलवार को राज्य के दोनों सदनों में गूंजा।
खुदकुशी की घटनाओं पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार ने कहा कि किसानों को मुश्किल से बाहर निकलने में मदद के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं।
प्रश्नकाल व अन्य कार्यवाही को रद्द कर दोनों सदनों में इस मुद्दे पर चर्चा हुई, जिस दौरान सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच आरोपों-प्रत्यारोपों की झड़ी लग गई।
विधान परिषद में विपक्षी पार्टियों ने खुदकुशी करने वाले किसानों की याद में मौन रखने की मांग की, जिसे राज्य में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने ठुकरा दिया।
विधान परिषद के सभापति स्वामी गौड़ ने कहा कि चर्चा के बाद सदन संवेदना जता सकता है।
वहीं, विधानसभा में प्रदेश के कृषि मंत्री पी.श्रीनिवास रेड्डी ने कहा कि किसानों की मदद के लिए सरकार की कोशिशों के बावजूद उन्होंने आत्महत्या की और ऐसा कम बारिश के चलते फसलों को हुए नुकसान के कारण किया।
मंत्री ने वर्तमान परिस्थितियों के लिए अविभाजित आंध्र प्रदेश की पिछली सरकारों की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि कम वर्षा के कारण पांच जिलों में 50-70 फीसदी तक फसलें बर्बाद हुई हैं। महबूबनगर जिले में 100 फीसदी फसलें तबाह हो गईं।
उन्होंने कहा कि किसानों के लिए 17 हजार करोड़ की ऋण माफी योजना के तहत सरकार 50 फीसदी रकम खर्च कर चुकी है।
सरकार ने आत्महत्या करने वाले किसानों के परिजनों का मुआवजा 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर छह लाख रुपये कर दिया है।
कुछ दिनों पहले मंत्री ने कहा था कि 15 महीनों के दौरान 430 किसानों ने खुदकुशी की। वहीं, विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि बीते साल जून में राज्य के बंटवारे के बाद से लेकर अब तक 1,400 किसानों ने आत्महत्या की।
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