सुषमा स्वराज 2 दिवसीय मालदीव दौरे पर

माले/नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज शनिवार को दो दिवसीय दौरे पर मालदीव पहुंचीं। वह अपने समकक्ष के साथ एक संयुक्त आयोग की बैठक में हिस्सा लेंगी।

माले/नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज शनिवार को दो दिवसीय दौरे पर मालदीव पहुंचीं। वह अपने समकक्ष के साथ एक संयुक्त आयोग की बैठक में हिस्सा लेंगी।

सुषमा के साथ विदेश सचिव एस. जयशंकर भी हैं।

माले में स्थित इब्राहिम नासिर अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर मालदीव के विदेश मंत्री दुनया मौमून ने सुषमा की अगवानी की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने ट्वीट किया, “यादगार मालदीव! विदेशमंत्री सुषमा स्वराज की अगवानी विदेशमंत्री दुनया मौमून ने माले में इब्राहिम नासिर अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर की।”

सुषमा का मालदीव दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब जेल में कैद पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद की रिहाई की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मांग हो रही है।

विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा था कि सुषमा मालदीव दौरे के दौरान रक्षा एवं सुरक्षा संबंधों पर चर्चा करेंगी। इसके अलावा ऊर्जा सहित कई सारे क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा करेंगी।

नशीद के कारावास पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हमें आशा है कि हर व्यक्ति को परिणाम अच्छा देखने को मिलेगा। परिणाम अच्छा होना चाहिए।”

मालदीव के पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद जमील अहमद ने शनिवार को ट्वीट किया, “मैं राष्ट्रपति यामीन से पूर्व राष्ट्रपति नशीद और अन्य सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करने और अंतर्राष्ट्रीय कानूनी जिम्मेदारी का पालन करने का आग्रह करता हूं।”

उन्होंने पोस्ट में लिखा, “राष्ट्रपति यामीन मालदीव में लोकतंत्र को चलने दें, राजनीतिज्ञों की गिरफ्तारी और हिरासत बंद करें।”

एमनेस्टी इंडिया ने ट्वीट किया, “मालदीव दौरे के दौरान सुषमा स्वराज को चाहिए कि वह पूर्व राष्ट्रपति नशीद की तत्काल रिहाई का आग्रह करें, क्योंकि उन्हें सरासर पक्षपातपूर्ण सुनवाई के बाद गिरफ्तार किया गया था।”

मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के ट्विटर हैंडल पर कई सारे छायाचित्र जारी किए गए हैं, जिनमें हजारों की संख्या में मालदीव के नागरिक नशीद की रिहाई की मांग को लेकर माले की सड़कों पर उतर आए हैं।

ब्रिटिश अरबपति और वर्जिन समूह के संस्थापक रिचर्ड ब्रैंसन ने तब नशीद की रिहाई की अपनी मांग फिर दोहराई है, जब संयुक्त राष्ट्र की एक अधिकारवादी संस्था ने उनके कारावास को मनमानापूर्ण और अवैध घोषित कर दिया है।

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