‘कुल्लू दशहरा’ में पशु बलि अब बंद

कुल्लू(हिमाचल प्रदेश), 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। पिछले वर्ष उच्च न्यायालय के प्रतिबंध लगाने के बाद से अपने खास दशहरे के लिए विश्वविख्यात कुल्लू जिले में धार्मिक रीति-रिवाज के नाम पर पशु बलि अब बंद हो गई है। एक अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

उपायुक्त राकेश कंवर ने एक बयान में कहा, “सितंबर 2014 में उच्च न्यायालय के पशु बलि पर प्रतिबंध लगाने के बाद से अब तक इसकी एक भी घटना नहीं देखी गई है।”

कंवर ने कहा कि प्रशासन ने पशु बलि रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं और देव समाज (देवों के प्रतिनिधि) भी अदालत के आदेश का पालन कर रहे हैं।

परंपरा के मुताबिक, कुल्लू दशहरा के समापन दिवस पर एक भैंस, एक भेड़, एक केकड़े और एक चूजे की बलि देने की प्रथा थी।

इस वर्ष कूल्लू घाटी में दशहरा पर्व की शुरुआत 23 अक्टूबर को होगी।

कंवर ने आईएएनएस को बताया कि पिछले साल कुल्लू दशहरा पर्व प्रतिबंध लगने के तुरंत बाद था लेकिन फिर भी स्थानीय प्रशासन ने देव समाज को देवों को खुश करने की अपनी पुरानी प्रथा को भूल जाने के लिए मना लिया था।

कंवर ने कहा कि पिछले 350 वर्षो से भी अधिक में पिछले साल पहली बार ऐसा हुआ, जब किसी पशु की बली नहीं दी गई। प्रतीकात्मक बलि के तौर पर एक नारियल फोड़कर प्रथा को निभाया गया था।

‘पेरेन्स पैट्री’ (कानूनी रूप से अपनी रक्षा करने में असमर्थो की रक्षा के लिए राज्य प्रशासन को अनुमति देन वाला नियम) के तहत न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की पीठ ने माना था कि पशु और पक्षियों की बलि देने की प्रथा घिनौनी और नृशंस है।

न्यायपीठ ने यह कहते हुए मंदिरों में पशु बलि पर प्रतिबंध लगा दिया था कि देवताओं को खुश करने के लिए किसी जीव की हत्या की इजाजत नहीं दी जा सकती।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493