नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय कानून मंत्री डी.वी. सदानंद गौड़ा ने शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) अधिनियम निरस्त किए जाने के बाद कहा कि वह इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कानून विशेषज्ञों से परामर्श लेंगे।
सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक अहम फैसले में एनजेएसी अधिनियम को रद्द कर दिया और उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति व स्थानांतरण से संबंधित पुरानी कॉलेजियम प्रणाली बहाल करने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने संविधान के 99वें संशोधन और एनजेएसी अधिनियम को ‘असंवैधानिक’ करार दिया।
शीर्ष न्यायालय के फैसले से हैरान दिखे गौड़ा ने कहा, “मैं न्यायालय के फैसले को अच्छी तरह पढूंगा और उसके बाद प्रधानमंत्री, कानूनी विशेषज्ञों और अन्य लोगों से परामर्श लूंगा।”
उन्होंने कहा कि एनजेएसी अधिनियम ने जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व किया, क्योंकि लोकसभा एवं राज्यसभा के सभी सदस्यों ने इसे समर्थन दिया था।
गौड़ा ने संवाददाताओं को बताया, “जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व संसद के माध्यम से किया जाता है। हमने जन इच्छा का सम्मान किया। राज्यसभा एवं लोकसभा के 100 फीसदी सदस्यों ने इसे समर्थन दिया।”
कानून मंत्री ने कहा कि वह फिलहाल इस फैसले पर कुछ और नहीं कहेंगे।
उन्होंने कहा, “जहां तक इस फैसले का सवाल है, तो मैं अभी इस पर और कुछ नहीं कह सकता, क्योंकि मुझे इसे विस्तार से समझना होगा। हमें इस बारे में विस्तृत जानकारी लेनी होगी।”
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