वाशिंगटन, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका के मैडिसन में पुलिस अफसर के हाथों प्रताड़ना सहने वाले भारतीय बुजुर्ग के मामले में एक विशेषज्ञ ने अपनी गवाही में कहा है कि आरोपी अफसर ने बेहद हिंसक तरीके का सहारा लिया था। बुजुर्ग को एक ‘कटे हुए पेड़ की तरह’ जमीन पर गिराया था।
वाशिंगटन, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका के मैडिसन में पुलिस अफसर के हाथों प्रताड़ना सहने वाले भारतीय बुजुर्ग के मामले में एक विशेषज्ञ ने अपनी गवाही में कहा है कि आरोपी अफसर ने बेहद हिंसक तरीके का सहारा लिया था। बुजुर्ग को एक ‘कटे हुए पेड़ की तरह’ जमीन पर गिराया था।
सुरेशभाई पटेल नामक यह बुजुर्ग अपने पौत्र की देखभाल करने अमेरिका आए थे। यहां आने के कुछ दिन बाद ही उन्हें पुलिस अफसर एरिक पार्कर के हाथों जुल्म का शिकार होना पड़ा था।
एक निर्णायक मंडल द्वारा इस मामले में सर्वसम्मत फैसला नहीं देने के बाद मामले की फिर से सुनवाई हो रही है। इसी के तहत कैप्टन केन्नी सैंडर्स ने गुरुवार को हंट्सविले की अदालत में अपनी गवाही दर्ज कराई।
ए वन डॉट कॉम के अनुसार, लुइसियाना पुलिस प्रशिक्षण के वरिष्ठ प्रशिक्षक सैंडर्स ने अदालत से कहा कि सुरेशभाई के मामले में पार्कर ने राष्ट्रीय पुलिस के मानकों के अनुसार कार्रवाई नहीं की।
सैंडर्स ने कहा, “उस दिन इस्तेमाल की गई तकनीक खासी हिंसक थी। मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा।”
सैंडर्स से पूछा गया कि सुरेशभाई पटेल (57) को जमीन पर गिराने को आप किस रूप में देखते हैं? उन्होंने कहा, “लकड़हारा, यही शब्द मेरे दिमाग में आया। जैसे कोई अपने बगीचे में पेड़ काट रहा हो।”
जमीन पर गिराने से पटेल को ऐसी चोट लगी कि उन्हें रीढ़ की हड्डी की सर्जरी करानी पड़ी। वह चल नहीं पा रहे हैं और हाथ से कुछ भी पकड़ने में उन्हें दिक्कत हो रही है। अपनी बात कहने के लिए उन्हें व्हीलचेयर में अदालत में आना पड़ रहा है।
इस मामले में एक पड़ोसी ने पुलिस को फोन किया कि एक ‘अश्वेत आदमी’ मैडिसन में घरों के पास घूम रहा है और गैरेजों में झांक रहा है।
बचाव पक्ष ने दलील दी हुई है कि पटेल ने अपना हाथ अफसर के पास से हटाया था और ऐसा लगा था कि वह जेब से हथियार निकालने जा रहे हैं।
इस पर सैंडर्स ने कहा, “अगर उन्होंने (पटेल ने) हटने की कोशिश की थी तो भी इतने बल प्रयोग की जरूरत नहीं थी..तरीका बहुत हिंसक था।”
उन्होंने कहा कि पटेल की उम्र, उनका डीलडौल, उनका अंग्रेजी न बोल पाना, कई अफसरों की मौजूदगी-ये तमाम बातें इस फैसले को करने के लिए काफी थीं कि पटेल से कैसा सलूक किया जाना चाहिए।
बचाव पक्ष ने कहा कि इस मामले को खत्म किया जाना चाहिए। अभियोजन यह साबित नहीं कर सका है कि पार्कर ने जान बूझकर पटेल के नागरिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।
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