मैसूर में 43वां आईपीसी सम्मेलन सोमवार से

मैसूर, 22 नवंबर (आईएएनएस)। काली मिर्च के कारोबार से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय समुदाय (आईपीसी) का 43वां सम्मेलन यहां 23 से 25 नवंबर तक आयोजित है। सम्मेलन में काली मिर्च में कीड़े और रोग नियंत्रित करने के लिए रसायनों के सीमित और सुरक्षित उपयोग पर चर्चा होगी। यह जानकारी यहां आईपीसी ने एक बयान में दी।

बयान में कहा गया है, “दुनियाभर में मसालों के उत्पादन में कीटनाशकों और अन्य रसायनों के अत्यधिक उपयोग की पृष्ठभूमि में यह सम्मेलन हो रहा है।”

आईपीसी एक अंतरसरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना युनाइटेड नेशंस इकॉनॉमिक एंड सोशल कमिशन फॉर एशिया एंड द पैसिफिक के तहत की गई है।

आईपीसी के मौजूदा अध्यक्ष ए. जयतिलक हैं, जो स्पाइसेस बोर्ड भारत के भी अध्यक्ष हैं।

जयतिलक ने एक बयान में कहा, “कर्नाटक को काली मिर्च उत्पादन में नवाचार अपनाने के लिए कई पुरस्कार दिए गए हैं। इसी कारण इस सम्मेलन के लिए मैसूर को चुना गया है।”

ब्राजील, भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया, श्रीलंका और वियतनाम सहित आईपीसी के सदस्य देशों के करीब 300 प्रतिनिधि सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

सम्मेलन में काली मिर्च की खेती, प्रसंस्करण, विपणन और शोध में हुई प्रगति पर चर्चा होगी।

स्पाइसेस बोर्ड भारत के मुताबिक, 2014-15 में 1,208.42 करोड़ रुपये मूल्य की 21,450 टन काली मिर्च का उत्पादन हुआ था, जो साल दर साल आधार पर 29 फीसदी अधिक है। 2013-14 में 940 करोड़ रुपये मूल्य की 21,250 टन काली मिर्च का उत्पादन हुआ था।

भारत से 2014-15 2.43 अरब डॉलर मूल्य के 8.93 लाख टन मसालों का निर्यात हुआ था, जबकि इससे एक साल पहले 2.26 अरब डॉलर अरब डॉलर मूल्य के मसालों का निर्यात हुआ था।

देश में मुख्य रूप से काली मिर्च का उत्पादन केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, पुड्डचेरी और अंडमान और निकोबाल द्वीप समूह में होता है।

अमेरिका काली मिर्च का सबसे बड़ा आयातक है। सिंगापुर, जर्मनी और नीदरलैंड तथा संयुक्त अरब अमीरात भी बड़े आयातकों में हैं।

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