आतंकवाद से निपटने के लिए नए वैश्विक संकल्प की जरूरत : मोदी (राउंडअप)

कुआलालंपुर, 22 नवंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मलेशिया दौरे के दूसरे दिन 21वीं सदी को एशिया की सदी बनाने वाले पांच सिद्धांतों का खाका खींचा और आतंकवाद का सामना करने के लिए नए वैश्विक संकल्प का आह्वान किया।

मोदी ने मलेशिया दौरे के दूसरे दिन 10वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में कहा, “पेरिस, अंकारा, बेरूत, माली में हुए बर्बर आतंकवादी हमले और रूस के विमान को गिराया जाना (पिछले माह मिस्र के सिनाई प्रांत में) इस बात के साफ संकेत हैं कि आतंकवाद की परछाई हमारे समाज और हमारी दुनिया पर फैल गई है, चाहे बात आतंकवादी संगठनों में भर्ती को लेकर हो या फिर निशानों को लेकर।”

मोदी ने कहा, “हमें आतंकवाद को राजनीतिक विचार के पलड़े में तौले बिना इससे लड़ने के लिए नए वैश्विक संकल्प और नई रणनीति तैयार करनी चाहिए।”

मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि किसी भी देश को आतंकवाद का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और न उसे समर्थन देना चाहिए।

उन्होंने कहा, “मैं आतंकवाद को धर्म से अलग करने की प्रतिबद्धता और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने वाले प्रयासों का स्वागत करता हूं।”

मोदी ने 21वीं सदी को एशिया की सदी बनाने के लिए पांच सिद्धांतों का खाका भी खींचा।

उन्होंने कहा, “सबसे पहले सुरक्षा सहयोग को लेकर ऐसे क्षेत्रीय ढांचे का समर्थन करें, जो समावेशी, संतुलित, पारदर्शी व सार्वजनिक हो।”

उन्होंने कहा, “दूसरा, समुद्र शांति एवं समृद्धि का मार्ग है। भारत, आसियान (दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों के संघ) के साथ अंतर्राष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुसार नौवहन स्वतंत्रता और निर्बाध व्यापार को लेकर प्रतिबद्ध है।”

उन्होंने कहा, “तीसरी बात यह कि हमें साइबर सुरक्षा पर दृढ़ प्रतिबद्धता और निकट सहयोग की जरूरत है।”

मोदी ने चौथे सिद्धांत के तौर पर क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी को लेकर जल्द नतीजे तक पहुंचने की बात भी कही।

उन्होंने कहा, “पांचवां, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन का मुख्य जोर विकास को लेकर सहयोग है। भारत अपने साझेदार देशों के प्रयासों को समर्थन देना जारी रखेगा।”

आसियान के तुरंत बाद आयोजित वार्षिक पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, कंबोडिया, चीन, इंडोनेशिया, जापान, लाओस, मलेशिया, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, रूस, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, अमेरिका और वियतनाम हिस्सा ले रहे हैं।

बाद में एक अन्य कार्यक्रम में मोदी ने भारतवंशियों को संबोधित करते हुए मलेशिया में उनकी उपलब्धियों की सराहना की।

मलेशिया के अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी एवं सम्मेलन केंद्र में 15,000 भारतवंशियों के ‘मोदी-मोदी’ के नारों के बीच मोदी ने अपनी बात की शुरुआत तमिल अभिवादन ‘वडक्कम’ से की।

मलेशिया की तीन करोड़ की आबादी में 20 लाख भारतवंशी हैं। इनमें अधिकांश तमिल हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार भारतीयों तक आधुनिक अर्थव्यवस्था से होने वाले लाभ पहुंचा रही है। मोदी ने कहा, “दुनिया में और कहां कुछ ही महीनों में 19 करोड़ बैंक खाते खोले गए हैं?”

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार उन शहीदों की याद में स्मारक बनाने के लिए मलेशिया सरकार के साथ काम करने के लिए तैयार है जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में मलेशिया में जान दी थी।

उन्होंने कहा कि आजाद भारत मलय भारतीयों का ऋणी है। मोदी ने कहा, “आपके पुरखे हजारों की संख्या में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में शामिल हुए थे। हम यहां सांस्कृतिक केंद्र का नाम बोस के नाम पर रखेंगे।”

मोदी ने कहा कि भारत और मलेशिया को एक-दूसरे की मेडिकल की डिग्री को मान्यता देना चाहिए। इस सिलसिले में वह मलेशिया के प्रधानमंत्री से बात करेंगे।

मोदी ने कहा, “भारत विविधताओं का देश है। हर नागरिक के पास समान अधिकार है जिसे अदालत संरक्षित करती है और जिसकी सरकार रक्षा करती है।”

मोदी ने कहा कि भारत केवल अपने ही क्षेत्र में सिमटा हुआ नहीं है। यह दुनिया में जहां कहीं भी भारतीय हैं, उन सभी में बसा हुआ है।

प्रधानमंत्री ने रविवार को पेतालिंग जाया स्थित रामकृष्ण मिशन में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने कहा, “वेद से लेकर स्वामी विवेकानंद तक, भारत की संस्कृति समृद्ध है।”

मोदी ने कहा, “हमें अपने दिल और आत्मा में स्वामी विवेकानंद को बिठाना चाहिए।”

मोदी ने रविवार को मलेशिया में भारतीय मूल के लोगों की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी मलेशियन नेशनल कांग्रेस (एमआईसी) के सदस्यों से मुलाकात भी की।

मोदी सोमवार को मलेशिया यात्रा का समापन कर सिंगापुर रवाना हो जाएंगे।

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