भोपाल, 24 नवंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश का बड़ा हिस्सा, जिसमें बुंदेखलंड भी शामिल है, सूखे से जूझ रहा है। इस क्षेत्र के कई गांव ऐसे हैं, जहां के किसान अकाल जैसे हालात से एकजुट होकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने न केवल पानी को सहेजा है, बल्कि भरपूर पैदावार भी की है।
राजधानी भोपाल में आयोजित एक कार्यशाला में पहुंचे बुंदेखले किसानों ने दुनिया में ‘जलपुरुष’ के नाम से चर्चित राजेंद्र सिंह को अपनी सफलता की कहानी सुनाई।
बुंदेलखंड में सूखा के चलते किसान आत्महत्या कर रहे हैं, वहीं कई तो रोजगार की तलाश में गांव छोड़कर जा चुके हैं, मगर छतरपुर जिले के झिरिया झोर गांव की पुनियाबाई के चेहरे पर आत्मसंतुष्टि को आसानी से पढ़ा जा सकता है। वह बताती है कि एक तरफ उनके गांव की महिलाओं ने मेड़-बंधान कर पानी रोका है, तो हैंडपंप सुधारने का हुनर भी सीखा है। यही कारण है कि अब उन्हें सिंचाई के लिए पानी की कमी नहीं सताती।
पुनिया बाई बताती है कि उसके गांव में खेती की सिंचाई के लिए पानी नहीं होता था, मगर उन्होंने प्रशिक्षण हासिल करने के बाद गांव में मेड़-बंधान किया। इससे उनके गांव में पर्याप्त पानी रहता है। वहीं खराब हैंडपंपों को महिलाएं भी ठीक करने लगी हैं।
टीकमगढ़ जिले के बनगांय पंचायत के हरिराम ने बताया कि गांव में तालाब तो हैं, मगर उनमें पानी ठहर नहीं पाता था, परमार्थ समाज सेवा संस्थान के सहयोग और गांव वालों के अंशदान से तालाबों का हाल सुधर गया है और पानी भी रुकने लगा है। वह आगे बताते हैं कि बनगांय में कराए गए काम को कई अन्य लोगों ने देखा तो दूसरे गांव के लोग भी उनके यहां आकर इसी तरह से तालाब मरम्मत का काम करा रहे हैं।
इसी तरह छतरपुर और टीकमगढ़ के ग्रामीण इलाकों से आए किसानों ने सामुदायिक सहयोग से बनाई गई जलसंरचनाओं के बारे में बताया। साथ ही उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में चाहे जिस क्षेत्र में सूखा हो, मगर उनके इलाके को इससे छुटकारा मिलेगा, क्योंकि वे पानी की एक बूंद भी बर्बाद नहीं होने देंगे।
कार्यशाला में पहुंचे कई किसानों ने जैविक खेती से फसल पैदावार की कम हुई लागत का ब्यौरा दिया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल न करने से उनकी लागत कम हो गई है, साथ ही मिट्टी की सेहत भी सुधरी है। इसके साथ पैदावार में इजाफा हुआ है।
इस मौके पर जलपुरुष राजेंद्र ने कहा कि बुंदेलखंड के कुछ गांव के किसानों ने जो काम किया है, वह छोटा जरूर है मगर बड़ा संदेश देने वाला है। जो भी इनके काम को देखेगा, वह भी इनकी राह आजमाने को मजबूर होगा।
उन्होने आगे कहा कि समस्या से निजात पाने के लिए समुदाय को एकजुट होना होगा, क्योंकि सरकारें जनता की जरूरतों को पूरा करने में सफल नहीं हो रही है। सरकारें अब भी बैठक, भोजन और धोखे (मीटिंग, ईटिंग और चीटिंग) से बाहर नहीं निकल पा रही हैं।
जल-जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने ग्रामीणों में विकसित हो रही सामुदायिक भावना का जिक्र किया और कहा कि गांव वालों की कोशिशों से एक और गांव पानीदार बने हैं, वहीं जैविक और स्थायी कृषि को बढ़ावा देकर किसानों ने कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया है। वहीं ग्रामीणों ने अपने गांव को जल संकट से निजात दिलाई है।
dharmpath.com dharmpath