चीन की नई 13वीं पंचवर्षीय योजना में नवाचार, समन्वय, खुलापन और साझेदारी के साथ पर्यावरण अनुकूल विकास की पांच नीति अपनाई गई है।
चीन के शहरों को प्रदूषण से निपटने के लिए पर्यावरण अनुकूल विकास को एक समाधान और जलवायु परिवर्तन का दायित्व पूरा करने के सबसे अच्छे तरीके के तौर पर देखा जा रहा है। यह चीन के न सिर्फ अपने लोगों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक स्वच्छ और समृद्ध भविष्य की सोच को परिलक्षित करता है।
ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के विश्लेषक जोसेफ जैकोबेली ने कहा कि ताजा पंचवर्षीय योजना इस बात की गवाह है कि ऊर्जा उत्पादन में स्वच्छ ऊर्जा के योगदान को बढ़ाना अब भी नेताओं की शीर्ष प्राथमिकता है।
योजना में पवन, सौर, बायोमास, पानी और जियोथर्मल स्रोतों से गैर-जीवाष्म ऊर्जा के विकास के लिए ऊर्जा क्रांति का वादा किया किया गया है। इसमें प्राकृतिक गैस और परमाणु ऊर्जा के उपयोग पर भी ध्यान दिया जाएगा।
सार्वजनिक परिवहन में भी कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए नवीन ऊर्जा वाहनों का उपयोग बढ़ाया जाएगा।
2020 तक कुल प्राथमिक बिजली खपत में चीन गैर-जीवाष्म ऊर्जा का योगदान बढ़ाकर 15 फीसदी करना चाहता है और उत्पादन में भी नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है।
ब्लूमबर्ग न्यू एनर्जी फाइनेंस के विश्लेषक डेमी झू ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन घटाना योजना का एक मुख्य लक्ष्य है।
झू ने कहा कि नई योजना में भारी उद्योग की जगह अत्याधुनिक विनिर्माण और सेवा उद्योग को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाएगा, जिसमें बिजली की खपत कम होती है।
योजना के मुताबिक, बिजली, इस्पात, रसायन और भवन निर्माण जैसे ऊर्जा खपत वाले उद्योगों पर उत्सर्जन नियंत्रण लगाया जाएगा।
योजना के मुताबिक, स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने के लिए एक पर्यावरण अनुकूल विकास कोष स्थापित किया जाएगा।
2011-2015 के बीच चीन का पर्यावरण संरक्षण उद्योग सालाना करीब 20 फीसदी की दर से विकास कर रहा है। इस क्षेत्र में इस दौरान 500 अरब डॉलर से अधिक निवेश किया गया है।
जलवायु परिवर्तन पर चीन के विशेष प्रतिनिधि शी झेन्हुआ ने गत सप्ताह कहा था कि 2017 में चीन एक राष्ट्रीय कार्बन उत्सर्जन ट्रेडिंग बाजार स्थापित करेगा।
सितंबर में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान शी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जलवायु परिवर्तन पर एक संयुक्त बयान जारी किया था। बयान में दोनों नेताओं ने उत्सर्जन घटाने के अपने वादे को पूरा करने की कार्ययोजना प्रस्तुत की।
चीन ने 20 अरब डॉलर का एक अलग कोष बनाने का भी वादा किया है, जिसका उपयोग दूसरे विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद करने में किया जाएगा।
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