न्यायमूर्ति ठाकुर ने प्रधान न्यायाधीश पद की शपथ ली (लीड-2)

नई दिल्ली, 3 दिसम्बर (आईएएनएस)। न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर देश के 43वें प्रधान न्यायाधीश बन गए हैं। उन्होंने गुरुवार को पद की शपथ ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें पद की शपथ दिलाई।

न्यायमूर्ति ठाकुर ने न्यायमूर्ति एच.एल. दत्तू का स्थान लिया है, जो दो दिसंबर को सेवानिवृत्त हो गए।

प्रधान न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति ठाकुर का कार्यकाल 13 माह का होगा। वह तीन जनवरी, 2017 को सेवानिवृत्त होंगे।

शपथ-ग्रहण समारोह में उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित अन्य हस्तियां मौजूद थीं।

शपथ-ग्रहण समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के कई अन्य पूर्व प्रधान न्यायाधीश भी मौजूद थे, जिनमें न्यायमूर्ति ए.एम.अहमदी, न्यायमूर्ति ए.एस.आनंद, न्यायमूर्ति के.जी. बालाकृष्णन, न्यायमूर्ति एस.एच. कपाड़िया तथा न्यायमूर्ति आर.एम. लोढ़ा शामिल हैं।

ठाकुर की पहचान मृदुभाषी और धैर्यवान लेकिन दृढ़ न्यायमूर्ति की है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्णय देने वाली खंडपीठों की अध्यक्षता की है। इनमें शारदा चिट फंड घोटाले की सीबीआई जांच का आदेश देना और आईपीएल स्पाट फिक्सिंग मामले में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में सुधार संबंधी फैसला सुनाना भी शामिल हैं। निवेशकों को पैसा नहीं लौटाने पर सहारा प्रमुख सुब्रत राय के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश देने वाली पीठ के भी वह अध्यक्ष थे।

4 जनवरी 1952 को जम्मू में जन्मे न्यायमूर्ति ठाकुर ने अक्टूबर 1972 में वकील के रूप में पंजीकरण कराया था। 16 फरवरी 1994 को वह जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश बने। मार्च 1994 में उनका तबादला कर्नाटक उच्च न्यायालय कर दिया गया और सितंबर 1995 में वह स्थाई न्यायाधीश नियुक्त किए गए। 2004 में उनका तबादला दिल्ली उच्च न्यायालय कर दिया गया।

11 अगस्त 2008 को वह पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने। 17 नवंबर 2009 को उनका तबादला सर्वोच्च न्यायालय में कर दिया गया।

न्यायमूर्ति ठाकुर अदालतों में रिक्त पड़े न्यायाधीशों के करीब 400 पदों पर नियुक्तियों को अपनी प्राथमिकता मान रहे हैं।

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