तिरुवनंतपुरम, 7 दिसम्बर (आईएएनएस)। केरल में विपक्षी वाम मोर्चे ने राज्य में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की पोस्टिंग को लेकर सरकार की ओर से मिले जवाब के विरोध में केरल विधानसभा से बहिर्गमन किया।
विपक्षी विधायक वी. श्रीरामकृष्णन ने इससे पहले इस मामले को लेकर विधानसभा में एक स्थगन प्रस्ताव लाने की मांग की थी।
राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने विधानसभा में कहा कि पुलिस अधिकारियों की तैनाती का फैसला मुख्यमंत्री ओमन चांडी की सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
चेन्नीथला ने कहा, “पुलिस अधिकारियों की तैनाती सरकार तय करती है, कोई और नहीं। यह राज्य में आपके (विपक्ष) के शासनकाल में भी हुआ। कोई भी पुलिस अधिकारी यह नहीं सोच सकता कि उसे किसी खास पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए..ऐसा हो नहीं सकता।”
विपक्षी विधायक श्रीरामकृष्णन ने सदन को बताया कि केरल में चार पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हैं, इसके बावजूद निगरानी एवं भ्रष्टाचार-रोधी ब्यूरो का नेतृत्व डीजीपी रैंक के अधिकारी की बजाय अतिरिक्त महानिदेशक को दिया गया।
इसके जवाब में गृह मंत्री ने कहा कि वाम मोर्चे ने भी अपने 10 साल के कार्यकाल के दौरान कई मौकों पर यही किया था।
उन्होंने कहा, “केरल के पास डीजीपी पद के लिए दो कैडर पद और दो गैर-कैडर पद हैं। हमने निष्पक्ष तरीके से काम किया। जैसे ही डीजीपी पद खाली हुआ, हमने एक एडीजीपी की पदोन्नति की।”
चेन्नीथला ने कहा, “जब आप (विपक्ष) बयान दें, तो कृपया सही तथ्य दें। हमने कभी कुछ गलत नहीं किया। हम जब नौ दिसंबर को प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे, तो उनसे केरल में डीजीपी की और कैडर पोस्ट बनाने का अनुरोध करेंगे।”
उन्होंने कहा, “कोई पुलिस अधिकारी किसी पद की मांग नहीं कर सकता। कम से कम इसकी अनुमति तो हमें दें।”
गृह मंत्री के जवाब से नाखुश विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया।
dharmpath.com dharmpath