नई दिल्ली, 11 दिसम्बर (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की बंबई उच्च न्यायालय के आदेश पर स्थगनादेश जारी करने की याचिका पर नेस्ले इंडिया और महाराष्ट्र सरकार की प्रतिक्रिया मांगी है।
बंबई उच्च न्यायालय ने ऐसे सरकारी प्रयोगशालाओं द्वारा खाद्य उत्पादों की जांच पर रोक लगा दी है, जो नए खाद्य सुरक्षा मानक कानून के तहत राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) से मान्यताप्राप्त नहीं हैं।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी. पंत की पीठ ने मैगी की बिक्री पर रोक लगाने की एफएसएसएआई की एक अन्य याचिका पर भी नोटिस जारी किया। एफएसएसएआई ने मैगी की बिक्री पर रोक लगाने का अनुरोध किया है, क्योंकि यह एक मालिकाना हक वाला उत्पाद है और इसकी बिक्री खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम-2006 की धारा 22 के विरुद्ध है।
धारा 22 में कहा गया है, “कोई भी व्यक्ति किसी नए खाद्य पदार्थ, जीन संवर्धित भोज्य पदार्थ, विकिरणित भोज्य पदार्थ, जैविक खाद्य पदार्थ, विशेष आहार उपयोग वाले भोज्य पदार्थ, फंक्शनल फूड और इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने वाले किसी भी भोज्य पदार्थो का निर्माण, वितरण, बिक्री या आयात नहीं कर सकता है।”
महान्यायवादी मुकुल रोहतगी ने हालांकि अदालत से कहा कि एफएसएसएआई अभी मैगी नूडल की बिक्री को रोकने वाली याचिका पर जोर नहीं दे रहा है।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के तहत 70 प्रयोगशालाएं काम कर रही हैं और बंबई उच्च न्यायालय के आदेश के कारण ये काम नहीं कर पाएंगी।
बंबई उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि एनएबीएल की मान्यता नहीं रखने वाली सरकारी प्रयोगशालाओं के निष्कर्ष पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी को मुकर्रर की है, क्योंकि नेस्ले इंडिया ने कहा है कि वह अपनी प्रतिक्रिया पांच जनवरी तक देगी।
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