कोलकाता, 12 दिसंबर (आईएएनएस)। पार्क स्ट्रीय दुष्कर्म मामले की पीड़िता के परिजनों ने शनिवार को कहा कि वे तीनों आरोपियों को दी गई सजा से संतुष्ट नहीं हैं और वे इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।
उन्होंने कहा कि वे सरकारी वकील की भूमिका से नाखुश हैं, क्योंकि उसने लगभग बचाव पक्ष का बचाव किया।
पीड़िता के पिता ने यहां एक स्थानीय टेलीविजन चैनल से कहा, “शुरू में जब मैंने सजा के बारे में सुना, तो मुझे लगा कि ठीक है, लेकिन जब मुझे पता चला कि सरकारी वकील ने लगभग बचाव पक्ष का बचाव किया, तब मुझे एहसास हुआ कि इसमें कुछ गड़बड़ी हुई है।”
उन्होंने कहा कि दोषियों को सरकारी वकील के अनुरोध पर न्यूनतम सजा मिली, क्योंकि सरकारी वकील ने कहा था कि वे घटना में प्रत्यक्ष तौर पर संलिप्त नहीं थे।
पार्क स्ट्रीट सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए सभी तीन अभियुक्तों को यहां एक स्थानीय अदालत ने शुक्रवार को 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2)(जी) के तहत दोषियों की न्यूनतम सजा है।
पीड़िता के पिता ने कहा, “मेरी बेटी मर गई है। क्या सरकारी वकील ने यह महसूस नहीं किया? अगर कोई सरकारी वकील आपके लिए चार साल से लड़ रहा है तो सजा अपराध से मेल खानी चाहिए, लेकिन सरकारी वकील ने बचाव पक्ष का बचाव किया है।”
उन्होंने कहा, “मेरा सवाल है कि यह कैसे हो सकता है? मैं उन्हें (आरोपी) इस गलती से आगे लाभ नहीं लेने देना चाहता। यह गलत है। मैं उनके किसी भी तरह के लाभ को रोकने के लिए उच्च न्यायालय में अपील करूंगा। मैं इससे खुश नहीं हूं।”
सत्र न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चिरंजीव भट्टाचार्य ने रुमन खान, नासिर खान और सुमित बजाज पर एक-एक लाख रुपये का जुमार्ना भी लगाया है।
कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में पांच फरवरी, 2012 को पांच व्यक्तियों ने बंदूक की नोक पर एक महिला के साथ चलती कार में दुष्कर्म किया था। महिला तलाकशुदा और दो बच्चों की मां थी। दुष्कर्म के बाद महिला के साथ मारपीट की गई और उसे चलती कार से फेंक दिया गया था।
महिला को उस वक्त अगवा कर लिया गया था, जब वह पार्क स्ट्रीट के नाइट क्लब से बाहर निकली ही थी।
इस मामले का प्रमुख आरोपी कादर खान और सहआरोपी मोहम्मद अली अभी भी फरार है।
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