नई दिल्ली, 16 दिसम्बर (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार ने बुधवार को इस बात को जोर देकर कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दफ्तर की छानबीन की है।
दिल्ली सरकार ने सवाल भी पूछा है कि सीबीआई ने आखिर नवंबर-दिसंबर के ‘फाइल मूवमेंट रजिस्टर’ रिकॉर्ड को क्यों जब्त किया?
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली के संसद में दिए उस बयान को गलत बताया, जिसमें जेटली ने कहा था कि सीबीआई ने केजरीवाल के दफ्तर की जांच नहीं की है।
सिसोदिया ने संवाददाताओं से कहा, “मैं बिल्कुल साफ शब्दों में कहना चाहता हूं कि वह मुख्यमंत्री का दफ्तर था, जहां छापा मारा गया और दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) की फाइल की तलाश की गई थी।”
सिसोदिया ने सवाल किया, “मुख्यमंत्री कार्यालय का फाइल मूवमेंट रजिस्टर जब्त किया गया है। अगर छापे का संबंध मुख्यमंत्री के मौजूदा कार्यकाल से नहीं है तो फिर रजिस्टर को क्यों जब्त किया गया?”
सिसोदिया ने कहा कि एक तरफ यह होता है और दूसरी तरफ “एक कैबिनेट मंत्री संसद में बयान देते हैं कि छापे का मुख्यमंत्री कार्यालय या उनके कार्यकाल से कोई संबंध नहीं है।”
सिसोदिया ने आरोप लगाया कि जेटली ने संसद को मूर्ख बनाया है।
जेटली ने मंगलवार को संसद में कहा था कि सीबीआई ने केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर छापा मारा है और इसका संबंध कुमार के पहले के कार्यकाल से है।
आम आदमी पार्टी (आप) नेता सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली सरकार या उनकी पार्टी किसी जांच से नहीं डरती। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सीबीआई की स्वायत्तता की बात उठाती रही है और आज भी इसकी पक्षधर है।
उन्होंने कहा, “(लेकिन) यह सीबीआई की आजादी की आवाज नहीं है, यह उसके मालिक की आवाज है।” उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल जांच एजेंसी का इस्तेमाल कर रहा है।
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