नई दिल्ली, 19 दिसम्बर (आईएएनएस)। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड मामले में शनिवार को पटियाला हाउस न्यायालय में पेश हुए।
भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी द्वारा एक नवंबर, 2012 को दायर की गई एक याचिका पर अदालत ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा, महासचिव ऑस्कर फर्नांडीस, पत्रकार सुमन दुबे, और टेक्न ोक्रेट सैम पित्रोदा को समन जारी किया था।
मामले का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है –
– 1938 में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से नेशनल हेराल्ड अखबार की शुरुआत की थी।
– अखबार को कांग्रेस के मुखपत्र के रूप में ‘एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड’ (एजेएल) द्वारा प्रकाशित किया जाता था। हालांकि दशकों बाद अखबार का सर्कुलेशन गिर गया और वित्तीय घाटे के चलते 2008 में 90 करोड़ रुपये के कर्ज के साथ अखबार को बंद कर दिया गया।
– एजेएल को बचाने के प्रयास में कांग्रेस पार्टी ने कंपनी को 2010 तक कुछ वर्षो के लिए बगैर किसी जमानत के ऋणमुक्त ब्याज दिया।
– 23 नवम्बर, 2010 को ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ नामक एक नई कंपनी ने एजेएल का अधिग्रहण कर लिया। इस कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित मोतीलाल वोरा, सुमन दुबे, ऑस्कर फर्नांडीस और सैम पित्रोदा को निदेशक बनाया गया।
– अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने एजेएल के लगभग 90 करोड़ रुपये के कर्ज को वाईआईएल के नाम स्थानांतरित करने का फैसला किया।
– दिसम्बर 2010 में वाईआईएल के नाम 90 करोड़ रुपये कर्ज के स्थानांतरण के एवज में एजेएल ने अपने सारे शेयर वाईआईएल को देने का फैसला किया। यंग इंडियन ने इस अधिग्रहण के लिए 50 लाख रुपये का भुगतान किया।
– इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी की मूल रूप से 90 करोड़ रुपये की कर्जदार एजेएल, यंग इंडियन की पूर्ण स्वामित्व वाली एक सहायक कंपनी बन गई।
– दिसम्बर 2010 में राहुल गांधी को कंपनी का निदेशक बनाया गया और जनवरी 2011 में सोनिया गांधी भी निदेशक बनाई गईं। मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नाडीस भी उसी दिन कंपनी के निदेशक बनाए गए।
– दस्तावेजों के अनुसार, सोनिया और राहुल की इस कंपनी में 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि बाकी 24 प्रतिशत में वोरा और फर्नांडीस की बराबर-बराबर हिस्सेदारी है।
– 2012 में स्वामी ने निचली अदालत में एक शिकायत दायर की, जिसमें आरोप लगाया कि कांग्रेसी नेता वाईआईएल द्वारा एजेएल के अधिग्रहण में हुई धोखाधड़ी और विश्वासघात में लिप्त थे।
– स्वामी ने आरोप लगाया कि वाईआईएल ने गलत तरीके से लाभ के लिए और 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति की बंद कंपनी को हथिया लिया।
– स्वामी ने आरोप लगाया कि वाईआईएल ने 90.25 करोड़ रुपये की वसूली का अधिकार हासिल करने के लिए मात्र 50 लाख रुपये का भुगतान किया।
– महानगर दंडाधिकारी गोमनी मनोचा ने सोनिया, राहुल और अन्य को 26 जून, 2014 को समन जारी किया और कहा कि सभी आरोपियों ने तथाकथित उद्देश्यों की पूत्रि के लिए एक-दूसरे के साथ मिलकर कथित रूप से काम किया। अदालत ने सभी आरोपियों को सात अगस्त, 2014 को पेश होने के लिए कहा था।
– 30 जुलाई, 2014 को कांग्रेसी नेताओं ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसने समन पर रोक लगा दी।
– सात दिसम्बर, 2015 को उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेताओं द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी और कहा कि प्रथम ²ष्टया मामले में आपराधिकता के साक्ष्य हैं।
– उच्च न्यायालय ने कांग्रेस पार्टी द्वारा एजेएल को जारी प्रारंभिक ऋण की वैधता के संबंध में भी सवाल उठाए।
– उच्च न्यायालय के आदेश के बाद आठ दिसम्बर को निचली अदालत ने सभी आरोपियों को 19 दिसम्बर को पेश होने का आदेश दिया।
– लखनऊ के अखबारों में शुक्रवार को एक नोटिस प्रकाशित हुआ था, जिसमें एजेएल को एक गैर-लाभकारी कंपनी में बदलने के लिए 21 जनवरी, 2016 को कंपनी की एक असाधारण आम बैठक की जानकारी दी गई थी।
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