नई दिल्ली, 23 दिसम्बर (आईएएनएस)। अयोध्या में राम मंदिर एवं दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) में कथित अनियमितता के मुद्दे पर बुधवार को राज्यसभा की कार्यवाही भोजनावकाश के पहले दो बार बाधित हुई।
ऊपरी सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जनता दल (युनाइटेड) के नेता के.सी. त्यागी ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर के निर्माण के लिए पत्थर पहुंचाने और उसे तराशने का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में साम्प्रदायिक तनाव फैलाया जा रहा है। इस पर सरकार ने कहा कि वह इस मामले में अदालत के आदेशों से बंधी है।
त्यागी ने कहा, “अयोध्या में एक बार फिर वैसी ही स्थिति बनाई जा रही है, जैसी पहले थी। तनाव भड़काया जा रहा है।”
समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) तथा कांग्रेस के सदस्यों ने भी त्यागी का समर्थन किया।
बसपा नेता मायावती ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर राम मंदिर मुद्दे को एक बार फिर उठाकर राजनीतिक लाभ उठाने के प्रयास का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “ऐसा कुछ भी नहीं होना चाहिए, जिससे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना हो। कानून-व्यवस्था बनाए रखना उत्तर प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है।”
खबरों के अनुसार, राम जन्मभूमि न्यास (ट्रस्ट) ने अयोध्या में उस स्थान पर मंदिर निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है, जहां बाबरी मस्जिद गिराया गया था।
इसका जवाब देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि उनकी पार्टी इस मामले में अदालत के आदेशों का अनुपालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, “पत्थरों को वर्ष 1990 से ही पॉलिश किया जा रहा है और जिस स्थान पर ऐसा किया जा रहा है, वह विवादित स्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है। दूसरा, सरकार और पार्टी (भाजपा) दोनों का मानना है कि अदालत के निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए और हम ऐसा करेंगे।”
उन्होंने कहा, “पत्थर तराशने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इसका अर्थ यह नहीं है कि राम मंदिर बनाया जा रहा है।”
इसके बाद कांग्रेस व सपा के सदस्य अध्यक्ष की आसंदी के निकट इकट्ठे हो गए और सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
उप सभापति पी.जे.कुरियन ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी।
सुबह 11.34 बजे सदन की कार्यवाही जब एक बार फिर शुरू हुई, कांग्रेस के सदस्य एक बार फिर अध्यक्ष की आसंदी के निकट इकट्ठे हो गए और डीडीसीए मुद्दे पर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के इस्तीफे की मांग की।
इसके बाद सभापति हामिद अंसारी ने शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सदन की कार्यवाही बाधित न करने का आग्रह किया, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ।
इसके बाद सदन की कार्यवाही अपराह्न एक बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
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