काबुल, 25 दिसम्बर (आईएएनएस)। भारत और अफगानिस्तान ने आतंकवाद, मादक पदार्थो व अतिवाद को गंभीर चुनौती के रूप में चिन्हित करते हुए कहा कि शांति के लिए अफगानिस्तान को सुरक्षित ठिकानों से आतंकवाद के बढ़ावे को खत्म करने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अफगानिस्तान के राष्ट्रपति मोहम्मद अशरफ गनी के बीच बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में अफगानिस्तान में आतंकवादी घटनाओं की कड़ी निंदा की गई।
बयान के मुताबिक, आतंकवाद, अतिवाद व मादक पदार्थो की गंभीर चुनौती से जूझ रहे दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान में सुरक्षा हालात पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
बयान के मुताबिक, “अफगानिस्तान में हाल के महीनों में आतंकवाद की बर्बर घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए दोनों नेताओं ने दोहराया कि अफगानिस्तान में शांति के लिए आतंकवाद के बढ़ावे को समाप्त करने और सुरक्षित स्थानों से उसके समर्थन को बंद करने की जरूरत है।”
मोदी ने अफगानिस्तान की एकता, क्षेत्रीय अखंडता व सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारत के पूर्ण समर्थन की बात दोहराई।
मोदी व गनी ने इस बात पर भी सहमति जताई कि हिंसा को बढ़ावा देनेवाले को अफगानिस्तान के किसी भी हिस्से पर प्रभाव नहीं डालने दिया जाएगा।
बयान के मुताबिक, “कोई भी समूह या व्यक्ति जो अफगानिस्तान के लोगों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देता है और अफगानिस्तान सरकार को हिंसा व आतंकवाद के बल पर चुनौती देता है, उसे किसी भी सूरत में अफगानिस्तान के किसी भी हिस्से पर प्रभाव जमाने की इजाजत नहीं दी जा सकती, क्योंकि बीते लगभग डेढ़ दशक के दौरान अफगानिस्तान व अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने बड़े बलिदान के बाद जो भी हासिल किया है, उसे गंभीर खतरा हो सकता है।”
बयान में भारत द्वारा दिए जा रहे एमआई-25 हेलीकॉप्टरों की भी चर्चा की गई और दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान की सुरक्षा व सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण अवसरों को विस्तार देने पर सहमति जताई।
मोदी ने काबुल में भारतीय दूतावास, चार वाणिज्य दूतावासों (कंधार, जलालाबाद, हेरात व मजार-ए-शरीफ), अफगानिस्तान में विभिन्न विकास परियोजनाओं में काम कर रहे भारतीय नागरिकों सहित अन्य भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अफगानिस्तान के अधिकारियों का शुक्रिया अदा किया।
उन्होंने अफगानिस्तान में कार्यरत भारतीय सहायताकर्मियों, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के कर्मियों तथा दूतावास के अधिकारियों से भी मुलाकात की।
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